मुजफ्फरनगर, 29 अप्रैल। अवैध वसूली में फंसे रागिब राना की गिरफ्तारी को लेकर घंटों ड्रामा चलता रहा। सुजडू चुंगी पर उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने रोका तो चार साल के बच्चे के साथ महिलाएं सड़क पर लेट गईं। हंगामा होने पर पुलिस ने गिरफ्तारी का इरादा त्याग दिया। पुलिस ने खुद ही अवरोध हटा दिए। बाद में उसने कचहरी पहुंचकर आमरण अनशन शुरू कर दिया।
सोमवार को रागिब राना ने परिवार के साथ डीएम कार्यालय के सामने आमरण अनशन का ऐलान किया था। सिखेड़ा क्षेत्र में जिला पंचायत के ठेके के नाम पर अवैध वसूली करने के मामले में रागिब वांछित है। उसकी गिरफ्तारी के लिए सुबह से ही एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना, सिटी मजिस्ट्रेट इंद्रमणि त्रिपाठी, सीओ सिटी संजीव वाजपेयी कई थानाें की पुलिस को लेकर सुजडू चुंगी पहुंच गए। परिवार की महिलाओं के साथ कलक्ट्रेट के लिए निकले रागिब को चुंगी पर पुलिस ने रोका तो वह बिफर पड़ा। महिलाएं भी चीखने-चिल्लाने लगी। रागिब ने अपने चार साल के बेटे को तपती सड़क पर लिटा दिया। महिलाएं भी लेट गईं। पुलिसकर्मियाें से हाथापाई और नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस-प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। वक्त की नजाकत को समझते हुए पुलिस ने अवरोध हटा दिए। रागिब पारिवारिक सदस्याें के साथ नारेबाजी करते हुए कचहरी पहुंचा और आमरण अनशन शुरू कर दिया। रागिब का कहना था कि पुलिस ने उसे झूठा फंसाया है।
कानून अपना काम करेगा
डीएम सुरेंद्र सिंह का कहना है कि रागिब राना ब्लैकमेल करने के लिए ड्रामा कर रहा है। वह वांछित है और कानून अपना काम करेगा। यदि वसूली में रागिब ने मध्यस्थता की है तो वह खुलकर उनके नाम बताए। प्रशासन हर आरोप की जांच करने के लिए तैयार है। दोषियों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
नाजायज नहीं फंसाया गया
एसएसपी मंजिल सैनी का कहना है कि रागिब को नाजायज नहीं फंसाया गया है। पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं। मीडिया को जारी सीडी में भी उसका एक साथी दारोगा से नाम निकलवाने की बात कर रहा है। पकड़े गए तीन साथियों ने अपने बयानों में उसका नाम लिया है।
सभासद को आड़े हाथ लिया
अनशन के दौरान पालिका सदस्य असद जमां और दिलशाद पहलवान समझाने के लिए अनशन पर चले गए। उनके अनुरोध पर रागिब भड़क गया। प्रशासन के दूत बताते हुए उन पर जान से मारने की धमकी देते हुए हंगामा शुरू कर दिया। फजीहत से बचने के लिए दोनों वहां से वापस हो लिए।