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शुक्रताल में 10

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मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुक्रताल स्थित सती अनुसुइयां धाम के महंत परम पूज्य स्वामी जुम्मादास जी महाराज ने बुधवार शाम को देह त्याग किया। बृहस्पतिवार दोपहर को ब्रह्मलीन स्वामी को समाधि दी गई। इस मौके पर भारी संख्या में संत समाज और भक्तों ने श्रद्धांजलि दी।
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108 वर्षीय संत जुम्मादास महाराज चरथावल क्षेत्र के गांव लुहारी खुर्द से शुक्रताल आए थे। उन्होंने शुक्रताल अनुसुइयां धाम में रहते हुए सरल ईश्वर भक्ति का प्रचार किया। नशामुक्ति अभियान व शिक्षा को बढ़ावा देना उनका मुख्य उद्देश्य था। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की सामाजिक नीतियों को आदर्श मानते हुए जनकल्याण के लिए कई कार्य किए। बृहस्पतिवार दोपहर को सती अनुसुइयां धाम में ब्रह्मलीन स्वामी को समाधि दी गई। इस मौके पर परम शिष्य सतीशदास जी महाराज, स्वामी सत्यानंद महाराज, स्वामी गोरधनदास, स्वामी ओंकारदास, स्वामी हरिनाथ, स्वामी कर्मदास, स्वामी ब्रजनाथ, स्वामी विक्रमदास, आचार्य गंगधारी, स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी वेदप्रकाश, करणानंद महाराज, संत सागर महाराज, रविदासीय धर्म अखाड़ा के संत एवं महापुरुषों सहित बसपा विधान सभा क्षेत्र अध्यक्ष सतीश गौतम, बसपा जिला प्रभारी संजय, रवि प्रमुख, धीरसिंह, पूरणसिंह, श्यामलाल, चेयरमैन रविदत्त, सुंदर डीलर, डॉ सुरेन्द्र, मास्टर शीशपाल, ईश्वरचंद, भंवरसिंह, कुलदीप, डॉ सुरेश आदि ने श्रद्धांजलि दी।
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