वोटर लिस्ट से गली-मोहल्ले साफ, हंगामा
मुजफ्फरनगर।
मतदाता सूची से वोटरों के नाम कटने पर खूब हंगामा हुआ। शहर में कई कालोनियों में मतदाता सूची से गली, मोहल्ले साफ हो गए। इस पर वोटरों का पारा चढ़ गया। हंगामा कर जान बूझकर पालिका प्रशासन पर वोट काटने के आरोप लगाए। प्रशासनिक अफसरों से शिकायत के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका। इससे वोटर बूथों से निराश होकर लौट गए। यह समस्या मुस्लिम क्षेत्रों के साथ पॉश कालोनियों तक में रही।
शहर की सीट पर रविवार की सुबह साढ़े सात बजे से मतदान शुरू कराया गया। सुबह ठंड होने के कारण वोटर कम संख्या में बूथ पर पहुंचे। सूरज निकलने के साथ मतदाता भी बूथों की ओर चल पड़े। हाथों में आधार कार्ड, राशन कार्ड लेकर मतदाता बूथ पर पहुंचे तो सूची में घंटों तक नाम तलाशते रहे। वार्ड 20 संतोष विहार के पुरुषार्थी कन्या पाठशाला में बने बूथ पर वोट डालने आए लोगों ने हंगामा किया। इन लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हो गए। आक्रोशित लोगों ने कहा कि विधानसभा चुनाव में इसी पते पर वोट डाली थी, जो निकाय चुनाव में गायब हो गई। यह सब साजिश के तहत किया गया है। रामपुरी के बूथों पर ऐसी शिकायत रही। मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने से वोटर बैरंग लौट गए। सबसे बड़ी समस्या वार्ड 41 अहता औलिया तहसील पर रही। यहां पूरी गली के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में ढूंढे नहीं मिल पाए। इस पर खूब हंगामा हुआ। हंगामा होने पर पुलिस फोर्स ने वोटरों को हड़का कर भगाया।
वार्ड एक रैदासपुरी के बूथों पर भी करीब 100 से अधिक लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिले। वार्ड-18 ब्रहृमपुरी के कई मोहल्लों, अबूपुरा क्षेत्र में भी वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिलने से वोटर मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। उधर, लोगों ने डीएम से शिकायत की। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने भी साफ किया कि वोटर लिस्ट में जिस मतदाता का नाम है, केवल मताधिकार का प्रयोग वहीं कर सकता है।
कई बूथों पर परिवार से बिछुड़े बच्चे
मुजफ्फरनगर। मतदान स्थलों पर अनेक परिवार बच्चों को साथ लेकर वोट डालने आए। इस दौरान मां और पिता वोट डालने बूथ के भीतर चले गए। जबकि बच्चों को बाहर छोड़ दिया। डीएवी इंटर कालेज, खालापार क्षेत्र और रामपुरी के बूथों पर कई बच्चे अपने परिजनों से बिछुड़ गए। जिन्हें पुलिस कर्मियों ने बामुश्किल परिजनों के हवाले किया।
नहीं दबाया बटन, बैलेट पर लगी मुहर
मुजफ्फरनगर। लोकसभा, विधानसभा में शहर में वोट डालने के लिए ईवीएम का प्रयोग किया गया। ऐसे में वोटरों को मशीन पर बटन दबाने की आदत है, लेकिन निकाय चुनाव में बैलेट पेपर का प्रयोग किया गया, जिसके चलते वोटर मतदान अधिकारियों से मुहर लगाने की जानकारी लेने में लगे रहे। बैलेट पेपर पर मुहर लगाने में वोटर हिचकिचाते रहे।