कर्मचारी जिम्मेदारी निभाते तो नहीं होता हादसा
मुजफ्फरनगर। एक माह पहले खतौली में हुए उत्कल एक्सप्रेस हादसे में कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। जांच में सामने आया कि ट्रैक असुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर भी कंट्रोलर ने ब्लॉक नहीं दिया, न ही ड्यूटी स्टेशन मास्टर प्रकाशचंद ने ट्रेन को स्टेशन पर रोका। न ही ट्रैक ठीक कर रहे पीडब्ल्यूआई के जेई प्रदीप कुमार और कर्मचारियों ने लाल झंडी दिखाकर ट्रेन को रोकने का प्रयास किया।
विभागीय जांच में सामने आया है कि पथ निरीक्षक मोहनलाल मीणा द्वारा ब्लॉक लेने के लिए बनाए गए मीमो में भी विरोधाभास है। मीमो में भी छेड़छाड़ की गई है। जांच में पाया गया है कि ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ब्लॉक लेने के लिए मीमो तैयार किया गया था। इसमें 20 अगस्त की तारीख लिखी गई, जबकि इसकी कार्बन कापी में छेड़छाड़ कर 19 अगस्त तारीख दर्शाई गई है। उत्कल ट्रेन हादसे की विभागीय जांच कर रहे कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) एसके पाठक की जांच अंतिम चरण में है, जो अपनी जांच रिपोर्ट इसी माह रेलवे मंत्रालय को सौंप सकते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारी ने उक्त सभी रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों के बनाए दर्ज किए। बयान में रेलवे कंट्रोलर, पथ निरीक्षक, जेई, ड्यूटी स्टेशन मास्टर ने एक दूसरे लापरवाही का आरोप लगाया। सूत्रों के अनुसार सीआरएस इंक्वायरी में कंट्रोलर, ड्यूटी स्टेशन मास्टर, पथ निरीक्षक, जेई और पीडब्ल्यूआई कर्मचारी दोषी पाए गए है।
जीआरपी की जांच भी जल्द होगी पूरी
मुजफ्फरनगर। उत्कल ट्रेन हादसे के संबंध में खतौली जीआरपी चौकी प्रभारी अजय कुमार की ओर से मुजफ्फरनगर जीआरपी थाने पर मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी जांच सीओ जीआरपी गाजियाबाद रणधीर सिंह कर रहे हैं। उनकी जांच भी अंतिम चरण में है और वो जल्द ही जांच रिपोर्ट जीआरपी एसपी मुरादाबाद को सौंपेंगे। जीआरपी की जांच पूरी होने पर दुर्घटना के आरोपी बनाए गए रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी होगी।