खाते में पड़े 8.43 करोड़ को खर्च का इंतजार
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका में मची खींचतान से शहर के विकास को ग्रहण लग रहा है। आए दिन के विवादों के चलते विकास को आई करीब 8.43 करोड़ की धनराशि खाते में ही पड़ी है। रकम को खर्च करने की समय सीमा 31 मार्च तक है, लेकिन इसके टेंडर भी जारी नहीं हो पाए हैं।
नगर पालिका को 14वें वित्त से 8.43 करोड़ रुपये मिले थे लेकिन यह राशि अभी तक खाते में ही पड़ी है। राशि को खर्च करने के लिए नगर पालिका अपने प्रस्ताव तैयार करती है। इन प्रस्तावों पर प्रशासनिक कमेटी की मोहर लगती है। जिले में प्रभारी अधिकारी नगर निकाय, दो विभागों के अधिशासी अभियंताओं की कमेटी बनी है। चेयरपर्सन की मौजूदगी में कमेटी में शामिल अधिकारी सूची को अंतिम रूप देते हैं और इसके बाद ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू होती है। अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस रकम को खर्च करने के लिए करीब डेढ़ माह का ही समय बचा है। प्रक्रिया पूरी न होने पर रकम लैप्स होने की आशंका है।
ब्याज के 3.95 करोड़ खर्च करने की मिली अनुमति
14वें वित्त की धनराशि के ब्याज के बकाया करीब 3.95 करोड़ रुपये खर्च करने को भी शासन की अनुमति मिल चुकी है। इस धनराशि को 31 दिसंबर 2019 तक खर्च किया जाना था लेकिन नगर पालिका खर्च नहीं कर पाई। दिसंबर के बाद रकम को खर्च करने के लिए शासन से अनुमति की आवश्यकता थी। नगर पालिका की ओर से लिखे गए पत्र के आधार पर शासन ने इस धनराशि को खर्च करने की समय सीमा 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दी है।
सड़क, सफाई और पेयजल में काम की जरूरत
शहर के कई मोहल्लों में सड़कों की हालत बेहद खराब है। वार्ड चार के अंतर्गत मिमलाना रोड के आसपास क्षेत्र की गलियों में तो सड़क है ही नहीं। जलभराव और कीचड़ से सड़कें बजबजा रही हैं। सभासद सचिन कुमार का कहना है कि रामपुरी, साकेत कॉलोनी में सफाई व्यवस्था एवं कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी ठप है। पेयजल पाइप लाइन लीकेज की समस्या भी बनी है।
14वें वित्त की राशि से होने वाले कार्यों की सूची तैयार हो चुकी है। जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। - विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ।
- विकास कार्यों की सूची समिति के पास है। समिति से सूची स्वीकृत होने के बाद कार्य कराए जाएंगे। - अंजू अग्रवाल, चेयरपर्सन, नगर पालिका।