मुजफ्फरनगर। शासन का छिपे हुए टीबी रोगियों को खोजने का अभियान रंग ला रहा है। नए टीबी रोगियों को खोजने के लिए थोड़े-थोड़े आबादी क्षेत्र में अभियान चलाया जा रहा है। जनवरी माह में जिले की दस प्रतिशत आबादी में चलाए गए अभियान में 67 नए रोगी सामने आए हैं। इनका उपचार शुरू करा दिया गया है।
जनपद में 5463 सामान्य टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। इसके अलावा एमडीआर और एक्सडीआर के रोगी अलग हैं। जिले की 31 लाख 82 हजार की आबादी में से जनवरी माह में दस प्रतिशत आबादी क्षेत्र में नए टीबी रोगियों को खोजने का अभियान चलाया गया था। करीब 3716 लोग संदिग्ध रोगी पाए गए। इनकी बलगम जांच और एक्सरे कराए गए तो 67 नए रोगी सामने आए। इन सभी का उपचार शुरू कर दिया गया है।
500 रुपये प्रति मरीज दिया जा रहा पोषण भत्ता
मुजफ्फरनगर। टीबी के मरीजों को 500 रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ता दिया जा रहा है। अब तक करीब 60 लाख रुपये का पोषण भत्ता दिया जा चुका है। यह भत्ता मरीजों को अच्छे खानपान के लिए दिया जाता है।
तीन रोगियों को छह-छह लाख का उपचार
मुजफ्फरनगर। जिले में तीन रोगी ऐसे हैं जिन्हें लाखों का उपचार मुफ्त में दिया जा रहा है। सरकार टीबी को खत्म करने की दिशा में प्रयास कर रही है। नए मरीज खोजने के अलावा उनके उपचार पर भी भारीभरकम बजट खर्च किया जा रहा है। टीबी की एडवांस स्टेज के मरीजों का उपचार खर्च बहुत ज्यादा है। जिले में तीन मरीज ऐसे हैं जिन्हें बैडाकुलीन व टीबी की अन्य दवाइयां दी जा रही हैं। इस उपचार पर करीब छह लाख रुपये का खर्च आता है। पुरकाजी, बुढ़ाना और चरथावल के अस्पतालों से उनका उपचार जारी है।
टीबी के नए रोगियों को खोजने के लिए अभियान चलाया गया था। 67 नए रोगी सामने आए जिनका उपचार शुरू करा दिया गया है। - डॉ. लोकेश गुप्ता, जिला क्षय रोग अधिकारी।