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योगी पर टिकी मास्टर विजय सिंह की आखिरी उम्मीद

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धरने के 22 साल पूरे, लखनऊ में सीएम से मिलेंगे
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मुजफ्फरनगर।
शामली के चौसाना में 3200 बीघा सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए कलक्ट्रेट में धरनारत मास्टर विजय सिंह के धरने को 22 वर्ष पूरे हो गए हैं। दो दशक से ज्यादा वक्त से अहिंसात्मक आंदोलन में जुटे विजय सिंह की न्याय की आखिरी उम्मीद सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ पर टिकी है। उन्होंने ठंडे बस्ते में पड़ी जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए लखनऊ कूच करने का फैसला लिया है।
कलक्ट्रेट में 26 फरवरी 1996 को मास्टर विजय सिंह ने धरना प्रारंभ किया था। शामली के गांव चौसाना में करीब चार हजार बीघा सार्वजनिक भूमि एवं अन्य सरकारी संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने के लिए तब से वह धरनारत है। लंबे संघर्ष के बाद तत्कालीन बसपा सरकार में प्रमुख सचिव गृह जेएन चैंबर की पहल पर चौसाना की तीन सौ बीघा भूमि भूमाफिया से कब्जा मुक्त कराई गई थी। अभी भी करीब 3200 बीघा भूमि पर राजस्व रिकार्ड में हेराफेरी कर अवैध कब्जे का मामला जांच में लटका है। आरोपियों के खिलाफ 136 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। जांच में सियासी अड़ंगेबाजी की वजह से बीते छह साल में शासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मास्टर विजय सिंह ने वर्ष 2012 में मुजफ्फरनगर से लखनऊ तक पैदल यात्रा कर तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से भूमि से अवैध हटवाने की मांग की थी। सीएम के आदेश पर विशेष सचिव राजस्व जेपी सगर के नेतृत्व टीम गठित हुई। उनके बयान और साक्ष्य लिए गए, मगर आज तक शासन से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। विजय सिंह का कहना है कि अब सीएम योगी आदित्यनाथ से लखनऊ मेें भेंट कर न्याय मांगेंगे। सीएम के रुख पर ही वह आगे आंदोलन का चलाने का निर्णय लेंगे।
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सियासी दबाव में नहीं मिला न्याय
मुजफ्फरनगर। 22 साल में प्रदेश में ज्यादातर सरकारों ने मास्टर विजय सिंह के मामलों पर गंभीरता नहीं बरती। हालांकि उनका धरना विश्व का सबसे लंबा धरना घोषित हो चुका है। लिम्का, एशिया और वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया में उनके धरने का जिक्र है। सिस्टम के आगे बेबस विजय सिंह कहते हैं कि सियासी दबाव और लालफीताशाही के गठजोड़ के आगे उन्हें 22 वर्ष में न्याय नहीं मिला।
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