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गोरखपुर मेडिकल हादसे के बाद जागी सरकार

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मुजफ्फरनगर। गोरखपुर के मेडिकल कालेज में हुए हादसे के आठ माह बाद केंद्र सरकार की नींद टूटी है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से स्वास्थ्य विभाग में संसाधनों, मैन पॉवर के साथ दवाओं व अन्य चीजों का लेखा-जोखा मांगा है। जनपद के स्वास्थ्य विभाग से भी कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों ने रिपोर्ट बनाने का कार्य शुरू किया है।
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गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज (बीआरडी) में ऑक्सीजन की कमी के कारण दर्जनभर बच्चों की मौत हुई थी। इस हृदय विदारक घटना के बाद प्रदेश की सियायत में भूचाल आ गया था। घटना के आठ माह बाद अब केंद्र सरकार की भी नींद टूटी है। देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का लेखा-जोखा तलब किया गया है। इसकी जवाबदेही राज्य सरकारों को दी गई है। प्रदेश स्तर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पहुंचे पत्र के बाद योगी सरकार भी हरकत में आई है। प्रदेश सरकार ने सभी जिलों से स्वास्थ्य संसाधनों का ब्योरा मांगा है। शासन ने जिले में चल रही सीएचसी, पीएचसी के साथ उन पर ओपीडी, इमरजेंसी सेवाएं, मानव संसाधनों के साथ जीवनरक्षक दवाओं की जानकारी मांगी है। शासन ने पूछा है कि अस्पतालों पर किस स्तर की सेवाएं हैं और कहां-कहां कितने चिकित्सक तैनात हैं। उपकरणों की स्थिति क्या है और कितने कम हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में लगा है। सभी सीएचसी, पीएचसी के साथ दवा भंडार से भी जानकारी जुटाई गई है, ताकि इसे शासन को भेजा जा सके। स्वास्थ्य विभाग के चीफ फार्मेसिस्ट डॉ केसी राय ने बताया कि मानव संसाधनों के साथ जीवन रक्षक दवाओं की जानकारी मांगी गई है, जिसकी सूची बनाई जा रही है। इसके अलावा भी मानव संसाधनों, उपकरणों की बाबत जानकारी ली गई है।
70 से अधिक चिकित्सकों की जरूरत
मुजफ्फरनगर। जिले में स्वास्थ्य सेवा को पटरी पर लाने के लिए करीब 77 चिकित्सक चाहिए। ऐसे में प्रदेश सरकार ने जिले को चार चिकित्सक दिए हैं। मौजूदा समय में भी 73 चिकित्सकों की जरूरत है। उसके बाद ही आबादी और चिकित्सकों का अनुपात सही हो सकेगा।
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