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अगरबती बनाने वाली कंपनी के खिलाफ मुकदमा

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मुजफ्फरनगर। विधिक माप विज्ञान विभाग ने एक अगरबत्ती वाली कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए साढे़ तीन लाख रुपये का शमन शुल्क वसूल किया है। इस संबंध में कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत किया गया है।
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विधिक माप विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक हरीश कुमार प्रजापति ने बताया कि गत सात जनवरी को उनकी सोशल वेबसाइट पेज पर साइकिल ब्रांड अगरबत्ती बनाने वाली मैसूर की कंपनी एन रंगाराव एंड संस प्राईवेट लिमिटेड का प्रायोजित विज्ञापन प्रदर्शित हुआ। विज्ञापन में ओम शांति पूजा सामग्री के पैकेज का मूल्य 300 रुपये दर्शाया गया। किंतु पैकेज में पूजा सामग्री के विवरण सहित वजन का उल्लेख नहीं पाया गया। दूसरे प्रदर्शित पैकेज का मूल्य 70 रुपये दर्शाते हुए घी के दीये पूजा के लिए उपलब्ध कराने की बात कही गई। मगर प्रत्येक दीये में घी की मात्रा अथवा भार का अंकन नहीं पाया गया। कंपनी द्वारा इसी पेज पर अगरबत्ती का विवरण भी अमानक इकाई में घोषित किया जाना पाया गया। विधि के इस स्पष्ट प्राविधान के रहते उक्त विज्ञापन को भ्रामक एवं विधि-विरुद्ध मानते हुए विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
कंपनी द्वारा 12 जनवरी को ई-मेल के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए विधि के उल्लंघन से बचने का प्रयास किया गया। किंतु कंपनी का पक्ष विधिसंगत नहीं पाए जाने पर अपराध पंजीकृत करते हुए कंपनी को अवगत करा दिया गया। अंतत: कंपनी ने अपना अपराध स्वीकार किया और शमन द्वारा निस्तारण कराने का आवेदन प्रस्तुत किया। कंपनी के आवेदन पर सहायक नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान सहारनपुर संभाग, स्वाति कौशिक की ओर से दस पक्षकारों पर 35000 रुपये प्रत्येक के अंकन से 3.50 लाख रुपये का शमन शुल्क लगाया गया, जिसे कंपनी द्वारा डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करा दिया गया है।
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