भक्तों ने खूब फूलों की होली खेली
मुजफ्फरनगर। अबुपुरा स्थित अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महापुराण एवं कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा व्यास पंडित सीताराम त्रिपाठी चित्रकूट वालों ने सुदामा चरित्र, व्यास पूजन, फूलों की होली का सुंदर वर्णन किया। भक्तों ने जमकर फूलों की होली खेली।
कथा व्यास त्रिपाठी ने कहा कि सुदामा भले ही श्रीकृष्ण भगवान का सखा हो, लेकिन श्रीकृष्ण ने भी साक्षात मानवी रूप को ज्ञात कराया है कि भाग्य से ज्यादा और समय से पहले से किसी को भी कभी कुछ नहीं मिलता है, इसलिए मानवीय रूप को सोचना होगा कि जितना भी हो सके वो इतना अपने जीवन को भक्तिमय करें, ताकि उसके जीवन का उद्धार हो सके। सुदामा सखा रूप में भगवान श्रीकृष्ण के साथ खेलकर बड़े हुए, लेकिन उसकी गरीबी तब हटी, जब ठाकुर जी द्वारिकाधीश के राजा बने। राजा बनने के बाद उस पर वो कृपा हुई, तब जाकर ठाकुर जी की कृपा बनी। हर मानवीय रूप को सोचना होगा कि वह ठाकुर जी का गुणगान करें। ठाकुर जी कब किस समय किस पर कृपा कर दे ये किसी को भी नहीं पता। वेदपाठी पंडित राममिलन दूबे, रामानुज दूबे, अनिल त्रिपाठी, पंकज शुक्ला, छोटू, दीपक, रामानंद, धनीराम, रामजी का योगदान रहा।