विचारों की शुद्धि से मिलेगी मन को पवित्रता
मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि निर्मल मन से काम, क्रोध और लोभ आदि विकारों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। विचारों की शुद्धि से ही मन पवित्र होता है।
शुकदेव आश्रम शुक्रताल में कथा व्यास सुदर्शन आचार्य की श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि विचारों की शुद्धि जीवन का निर्माण करती है। मन के पवित्र भाव से विकारों पर नियंत्रण करें। भागवत जीवन में अलौकिक परिवर्तन लाती है। मन की स्वच्छता और पवित्रता नवीन चेतना को जागृत कर देती है। समस्या ग्रसित व्यक्ति के लिए भागवत वरदान है। भागवत के श्रवण से आत्मा को निर्मल बनाया जा सकता है। यज्ञमान शिव नारायण पारिक, विद्याधर, स्वामी खंडेश्वर, सुमन कृष्ण शास्त्री, हर्ष मणि भट्ट, आचार्य गिरीशचंद्र उप्रेति, राजू आदि मौजूद रहे।