संस्कारों का सदाचार से ही संरक्षण: आचार्य
मुजफ्फरनगर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में धर्म सभा में आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कारों का सदाचार से ही संरक्षण हो सकता है। न्याय नीति से अर्जित की गई कमाई से ही परिवार में सुख शांति होती है। ऐसा धन दान में दिया जाए तो अधिक फलदायी होता है।
आचार्य श्री ने कहा कि पुण्य के फल से ही सांसारिक वैभव मिलता है। जैन शास्त्रों में सात प्रकार के दान बताए गए हैं। यात्रियों के तीर्थ वंदना कराना, मंदिरों के जीर्णोद्धार में लगाना, शास्त्रों का जीर्णोद्धार ज्ञानदान करना, औषधि दान, आहारदान और अभय दान ये सातों प्रकार के दान जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम को बढ़ाने वाले पर्व के साथ परिवार में वात्सल्य बढ़ाने वाला पर्व भी हैं। महाराज ने कहा कि देश एवं राष्ट्र की रक्षा के साथ हम विषय वासनाओं, कामनाओं से अपनी आत्मा की रक्षा करें। प्रबंध समिति ने मंदिर में राखी सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया। विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।