मंदी से उबारने के लिए कोई पॉलिसी नहीं
मुजफ्फरनगर।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट ने रियल स्टेट से जुड़े लोगों को भी निराश किया है। इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है इस इंडस्ट्रीज को मंदी से उबारने के लिए कोई नई पोलिसी घोषित नहीं की गई।
द्वारिका सिटी के विशाल कुमार का कहना है कि बीते चार वर्ष से रियल स्टेट का काम मंदी की मार झेल रहा है। बजट में इस इंडस्ट्रीज के लिए कोई भी राहत नहीं पहुंचाई गई है। इंटीग्रेटिड टाउन सिटी और हाईटेक सिटी के लिए सरकार ने वर्ष 2005 में जो नीति बनाई थी, उसे 2014 को मोदी सरकार ने खत्म कर दिया था, जिससे यह इंडस्ट्रीज बीमार होती चली गई। अब इस बजट से आशा थी कि कोई घोषणा होगी, मगर ऐसा नहीं हो सका। एटूजेड डवलपर्स के देवेंद्र दहिया कहते हैं कि रियल स्टेट घाटे से गुजर रही है। इस पर सरकार ने मल्टी टैक्स लगाए हैं, जिससे लोग को मकान लेने में परेशानी हो रही है। सरकार को चाहिए कि वह सभी टैक्स खत्म कर एक ही टैक्स लागू करें, तभी लोगों को मकान सस्ता मिल सकता है। किरन सिटी के पंकज कुमार का कहना है कि आम बजट में इस कारोबार को कोई राहत नहीं मिली है, जिससे हमें निराशा हुई है। वसुंधरा सिटी के अमित चौधरी का कहना है बजट ने इस कारोबार से जुड़े लोगों को कोई राहत नहीं दी है। जीएसटी भी कम नहीं की गई। सीमेंट, रेत आदि निर्माण सामग्री पहले ही महंगी है। खनन पर रोक लगी है, ऐसे में भला कैसे लोगों का सस्ते मकान मिलने का सपना पूरा हो सकता है।
किराना व्यापारियों में भी मायूसी छाई
(फोटो समाचार)
मुजफ्फरनगर। वित्तमंत्री के आम बजट ने किराना कारोबारी को भी मायूस किया है। दाल, तेल, घी आदि सस्ता नहीं किया गया है। शहर की दाल मंडी के थोक व्यापारी गौरव जैन का कहना है कि सरकार को चाहिए था कि वह खाद्यान वस्तुओं की कीमतें कम करती। हर वस्तु पर जीएसटी है, ऐसे में कारोबार प्रभावित हो रहा है। दाल मंडी के फुटकर व्यापारी रजनीश कुमार भी आम बजट में फुटकर व्यापारियों को कोई राहत नहीं से नाखुश है। उनका कहना है कि फुटकर व्यापारियों को बजट में कोई राहत नहीं दी गई है।