शहर के 500 परिवारों का अपने घर का सपना साकार हो गया है। प्रदेश सरकार ने अधूरे पड़े कांशीराम आवास को तैयार कराकर आवंटित कर दिए हैं। 963 पात्र आवेदकों में से 500 को लॉटरी के माध्यम से आवास का आवंटन हुआ। विधवा और दिव्यांगों को आवास दिया गया। एससी, ओबीसी को कैटेगिरी के हिसाब से मकान दिया गया। जिन परिवारों को अपने मकान मिले उनमें 90 परिवार मुस्लिम भी शामिल हैं।
जिला पंचायत के चौधरी चरण सिंह सभागार में अफसरों की मौजूदगी में लॉटरी के माध्यम से कांशीराम आवास का आवंटन हुआ। एडीएम प्रशासन अमित सिंह, एमडीए के सचिव सियाराम मौर्य, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार की मौजूदगी चयनित अधिकारियों की टीम ने लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कराई। पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू हुई प्रक्रिया शाम चार बजे तक चली। कांशीराम आवास के लिए शहर में कुल 1600 लोगों ने आवेदन किया था।
पात्रता की जांच के बाद 963 आवेदकों की सूची बनाई गई थी। इनमें कुल 192 विधवा और दिव्यांग शामिल रहे। प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर सभी दिव्यांगों और विधवाओं को आवास आवंटित किए। एससी में कुल 176 पात्र थे, जिनमें आरक्षण के हिसाब से 115 को मकान आवंटित हुए। इसी तरह ओबीसी में कुल 531 पात्र थे, जिनमें 135 को 27 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से मकान मिले।
जिन पांच सौ लोगों को आवास का आवंटन किया गया, उनमें 90 आवास मुस्लिमों को भी दिए गए है। आवंटन की प्रक्रिया में डूडा के पीडी अजय कुमार अंबष्ट, डूडा पीओ संदीप सिंह, एपीओ धनप्रकाश, लोनिवि के एक्सईएन आदि मौजूद रहे। जिला प्रशासन ने आवंटन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद चयनित लोगों की सूची भी चस्पा कर दी है।
सात साल से अधूरे पड़े थे आवास
मुजफ्फरनगर। जिन कांशीराम आवास का आवंटन किया गया, ये सात साल से अधूरे पड़े थे। बसपा सरकार में इनका निर्माण शुरु हुआ था। बसपा सरकार के जाते ही सपा सरकार ने इन पर ध्यान नहीं दिया। भाजपा सरकार ने सबसे पहले एमडीए को खांजापुर में बने इन आवासों को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद आवेदन मांगे गए और फिर आवंटन किया गया।
20 साल में सपना पूरा हुआ
मुजफ्फरनगर। आबकारी में रह रही शालिनी भारद्वाज का कहना है कि बीस साल बाद उसका अपने मकान का सपना पूरा हुआ है। शादी के बाद से ही वह किराए पर थी और पति की मौत के बाद मकान की आस टूट चुकी थी। शहर के खादरवाला की विधवा मिथलेश भी मकान मिलने से बेहद खुश है। 15 साल से वह भी किराए के मकान में रह रही थी। अपना घर पाने वालों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो 15 से 25 वर्ष के बीच से किराए पर ही रह रहे हैं। उनके लिए घर मिलना किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं है।