खतौली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पड़ी खाली जगह में बनना था महिला अस्पताल।
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प्रस्तावों के कागजी घोड़े बस फाइलों में ही दौड़े
मुजफ्फरनगर। खतौली में जिस महिला अस्पताल को अब तक बनकर तैयार हो जाना चाहिए था, वह अभी तक प्रस्तावों के रूप में फाइलों के बीच इधर से उधर घूम रहा है। किस तरह से हवा में योजनाएं बनाई जाती है, यह मामला इसका उदाहरण है। शुरुआत में इसे सिंगल स्टोरी बनाया जाना था, लेकिन इंजीनियरों की टीम ने नक्शा बदलवा दिया। इसी उधेड़बुन में दिन बीतते गए और दो साल बाद भी अस्पताल का निर्माण शुरू भी नहीं हो पाया है।
करीब दो साल पहले खतौली में 50 बेड के महिला अस्पताल के निर्माण की स्वीकृति मिली थी। केंद्र सरकार से स्वीकृत एजेंसी एचएससीसी को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई और 7.47 करोड़ रुपये स्वीकृत भी हो गए। शुरू में खतौली सीएचसी परिसर में एक पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर यह अस्पताल बनना प्रस्तावित था। बिल्डिंग को तोड़ने में अड़चन आई तो तत्कालीन डीएम राजीव शर्मा ने इसे दूसरे स्थान पर निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने को कहा। यहां पर सिंगल स्टोरी बिल्डिंग बनाने का नक्शा तैयार हुआ। इसके बाद केंद्र सरकार की टीम ने मौका मुआयना किया। इस टीम ने अग्निशमन एवं अन्य सुरक्षा लिहाज से इस प्रस्ताव को ठीक नहीं माना। इस प्रक्रिया में आठ से नौ महीने लग गए। टीम के निर्देश पर पांच मंजिला बिल्डिंग के निर्माण का नक्शा तैयार किया गया। अब यह शासन स्तर पर स्वीकृति के लिए लंबित है। जब तक इस नक्शे को हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक निर्माण शुरू नहीं हो सकता।
अस्पताल बना नहीं, उपकरण खरीद लिए
50 बेड के महिला अस्पताल के लिए स्वीकृत 7.47 करोड़ रुपये में से 90 लाख रुपये उपकरण खरीद के लिए हैं। अस्पताल में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) का भी निर्माण होना है। जच्चा-बच्चा की पूर्ण देखभाल की व्यवस्था होगी। अभी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में केवल जिला महिला अस्पताल में यह व्यवस्था है। यहां 100 बेड का अस्पताल संचालित है।