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70 साल बाद भी मौलवियों की जकड़ में हैं मुस्लिम : फरहा

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शिक्षक नगर में चल रहे महिलाओं के धरना प्रदर्शन में शामिल होने जाती सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरह? - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। सीएए के विरोधियों की सद्बुद्धि के लिए सांस्कृतिक एवं सामाजिक महिला संगठन प्रेरणा की ओर से किए जा रहे भजन कीर्तन कार्यक्रम के चौथे दिन सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज उनके बीच पहुंचीं और उन्हें अपना समर्थन दिया। इस दौरान फरहा फैज ने सीएए के विरोध में किए जा रहे धरना प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी मुस्लिम कौम मौलवियों की जकड़ में है।
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बुधवार को शिक्षक नगर स्थित शिव पार्क में पहुंचीं अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि ईदगाह के मैदान में जो महिलाएं सीएए के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रही हैं उनको यह पता होना चाहिए कि सीएए भारत में रहने वाले मुसलमानों के लिए नहीं है। यह उन लोगों के लिए है जो भारत में प्रताड़ित होकर आ रहे हैं और यहां की नागरिकता लेना चाहते हैं। बिना वजह इसको लेकर शोर मचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एनपीआर को एनआरसी से जोड़कर मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। फरहा फैज ने कहा कि अगर इन्हें जानकारी होती तो जब सरकार ने इनके लिए तीन तलाक का कानून बनाया था, तब यह उसके समर्थन में घर से बाहर निकलतीं, लेकिन तब इनको फिरकों में बांट दिया गया और आज इनको एकजुट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि आजादी के 70 साल के बाद भी मुस्लिम कौम मौलवियों और कुछ सांप्रदायिक पार्टियों की जकड़ में है। हम लेके रहेंगे आजादी नारे पर कटाक्ष करते हुए फरहा फैज ने कहा कि मुसलमानों को इन मौलवियों से आजादी के नारे लगाने चाहिए।
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