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शादी के बंधन में बंधे 443 युगल, साक्षी बना शहर

Thu, 29 Mar 2018 12:13 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
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Group marriage scheme - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। जिले के इतिहास में पहली बार 443 जोड़ियों का एक साथ विवाह हुआ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के इस कार्यक्रम में 105 मुस्लिम युगल भी शामिल रहे। सामूहिक विवाह के दौरान मंगल गीत के साथ सात वचन भी पढ़कर सुनाए गए। जिले के प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया। सभी जोड़ियों को विवाह के सामान के साथ 20 हजार का चेक और शादी का प्रमाणपत्र दिया। विवाह के दौरान जहां बैंड बजा, वहीं मंच से खुशी में गीत गाए गए।
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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत नुमाइश ग्राउंड में ऐतिहासिक आयोजन हुआ। जनपद के इतिहास में पहली बार सभी समुदाय की जोड़ियों की एक साथ इतनी शादी हुई है। 443 जोड़ियों में 105 मुस्लिम जोड़ियां भी शामिल रहीं। विवाह स्थल पर एक तरफ फेरों की व्यवस्था थी और 20 पंडित बुलाए गए थे, तो दूसरी तरफ निकाह की व्यवस्था रही और छह मौलवी मौजूद रहे।

हालांकि विवाह स्थल पर केवल जयमाला का कार्यक्रम हुआ। निकाह और फेरों के कार्यक्रम सबने अपने हिसाब से अपने घरों आदि पर किए। सामूहिक विवाह के इस कार्यक्रम में जोड़ियों को परिवार चलाने के आवश्यक सामग्री के साथ 20 हजार का चेक और विवाह का प्रमाणपत्र दिया गया।
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प्रशासन ने सभी के लिए भोजन की व्यवस्था भी अलग से की थी। विवाह समारोह में प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया। जिलाधिकारी राजीव शर्मा ने नवदंपति को दिए जाने वाले सामान की लिस्ट पढ़कर सुनाई।
मुख्य अतिथि सतीश महाना ने कहा कि हमारी संस्कृति में विवाह एक संस्कार है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हम संस्कारों के साथ जीते हैं। शादी एक दूसरे के प्रति समर्पण भाव भी है। जीवनयापन करने के लिए आपसी समन्वय जरूरी है। लड़के के मॉ-बाप को चाहिए कि वह बहू को अपनी बेटी की तरह प्यार करें, जिसने अपनी बेटी दे दी उसने आपको सबकुछ दे दिया।

सुखी जीवन के लिए पति को पत्नी का ध्यान रखते हुए अपने मॉ-बाप की सेवा भी करनी चाहिए। विवाह समारोह को उन्होंने इंद्रधनुष की संज्ञा दी, जिसमें विभिन्न प्रकार के रंग होते हैं। यहां भी सभी धर्मों और जाति के युगल का विवाह एक साथ हुआ। इस अवसर पर सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक कपिलदेव अग्रवाल, उमेश मलिक, विक्रम सैनी, प्रमोद ऊटवाल, जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी, एसएसपी अनंतदेव तिवारी, अल्पसंख्यक आयोग सदस्य सुखदर्शन बेदी, जिला पंचायत अध्यक्षा आंचल तोमर, नगर पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष रामकुमार सहरावत, जगदीश पांचाल, कमलकांत कश्यप, श्रीकांत त्यागी, सुनील तायल, श्रीमोहन महाराज, शरद शर्मा, हरीश अहलावत, चेयरमैन शाहपुर प्रमेश सैनी, आकांक्षा समिति की पदाधिकारी भी मौजूद रही। कार्यक्रम का संचालन धूम सिंह ने किया।

किस्मत वालों के घर पैदा होती हैं बेटियां
एसएसपी के बाद प्रशासन ने नजीर बनाई है। सामूहिक विवाह में बड़े सलीके से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देने के साथ मेहमान नवाजी का तरीका समझाया है। निकाह के दौरान जोड़ों को इस्लाम और मेहमान नवाजी की विशेष पुस्तक दी गई, जिसमें आपसी भाईचारे-सौहार्द के साथ पैगंबर साहब के पैगाम को पेश किया गया।

इसके अलावा भी मुस्लिम समाज से जंग-ए-आजादी में कुर्बान हुए बहादुरों की याद दिलाई गई। निकाह के वक्त मौलवी ने समझाया कि मक्का में पैगंबर साहब जब खुदा का पैगाम लेकर लोगों के बीच पहुंचे, तो उन्होंने पत्थर मारकर शहर से निकाल दिया। इसका भी पैगंबर साहब ने दिलेरहमी और नरमी से जवाब दिया। इसके अलावा आपसी सौहार्द और भाईचारे की नींव मजबूत करने के लिए गैर मुस्लिम की मेहमान नवाजी का जिक्र किया गया। पुस्तक में मुख्य बिंदु साफ रहा है किस्मत वाले हैं वो लोग, जिन्हें बेटियां नसीब होती हैं।

इन चंद शब्दों में प्रशासन ने कन्या भ्रूण हत्या, बेटियों से नफरत आदि पर वार किया। खाना खिलाने की फजीलत को बयां किया। नवविवाहित जोड़ों को गरीब, यतीम और बेसहारा लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित किया। सबसे दिलचस्प यह है कि जंग-ए-आजादी में कुर्बानी देने वाले तमाम मौलाना, मौलवी और मुस्लिम समाज के बहादुर लोगों के साथ अन्य क्रांतिकारियों के बारे में बताया गया, ताकि नई पीढ़ी इनसे दूर न हो सके। बता दें कि होली पर्व पर एसएसपी अनंत देव ने पैगंबर साहब के संदेश को छपवाकर वितरित किया था।

विवाह शुभ मुहूर्त में, अनुदान एक माह बाद
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में आवेदन जनवरी माह में लिए गए थे, लेकिन इनका समय आगे बढ़ता गया। परिजनों ने शुभ मुहूर्त निकलवा कर वर-वधू के फेरे करा दिए। जबकि इसी तरह मुस्लिम समाज में भी दर्जनभर निकाह पूर्व में हो चुके थे। योजना में नाम आने के बाद बुधवार को पंडाल में पहुंचना पड़ा।

हालांकि यहां पर फेरे की रस्म नहीं की हुई, जबकि निकाह की भी रस्म अदायगी की गई। कार्यक्रम में शामिल हुए अधिकांश जोड़ों के पूर्व में ही फेरे हो चुके थे। विवाह की तमाम रस्म शुभ मुहूर्त और वेद-मंत्रों के साथ पंडित जी के निर्देशन में पूर्ण की गई। योजना का लाभ एक माह बाद मिला है। जिसके चलते अनेक कन्याएं पति को साथ लेकर ससुराल से पंडाल में पहुंची थीं। विवाह के लिए खतौली, पुरकाजी, जानसठ, मीरापुर, चरथावल, शाहपुर, बघरा, सदर तहसील, बुढ़ाना, मोरना, भोकरहेड़ी, सिसौली आदि क्षेत्रों से लगभग 443 जोड़े पहुंचे थे।

इन्हीं 100 से अधिक मुस्लिम समाज के जोड़े मौजूद रहे। प्रशासन की लेटलतीफी के कारण परिजनों ने कन्या-वर के फेरे पूर्व में ही करा दिए। कार्यक्रम में दतियाना के सचिन, मोगपुर का सचिन, बनेली का कृष्ण सिंह, जड़ौदा से देवेंद्र, मंसूरपुर के अंकित, कवाल का अनिल, बड़ौत से विनय, मोहिद्दीनपुर से विपिन, अमीरनगर से प्रत्यक्ष, जौहरा से राहुल, बिरसपाल, राकेश, कृष्ण, दीपक, अंकुर, विनीत अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। इनका विवाह फरवरी में हो चुका है। इसी तरह से दर्जनभर जोड़ों का पूर्व में निकाह हो चुका था। जिन्हें एक माह बाद अनुदान मिला है।
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