बालाजी सत्संग भवन में हुई श्रीमद्भागवत कथा
मुजफ्फरनगर। बाला जी धाम मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में कथा व्यास आचार्य मनीष भाई ओझा ने भगवान श्रीराम और श्री कृष्ण जन्म कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में जब पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे तो पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी व्यथा सुनाने के लिए तथा उद्धार के लिए ब्रह्मा जी के पास गई।
पृथ्वी पर पाप कर्म बहुत बढ़ गए यह देखकर सभी देवता भी बहुत चिंतित थे । ब्रह्मा जी सब देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी को भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर ले गए। उस समय भगवान विष्णु शयन कर रहे थे। स्तुति करने पर भगवान की निद्रा भंग हो गई। भगवान ने ब्रह्मा जी एवं सभी देवताओं को देखकर उनके आने का कारण पूछा तो पृथ्वी बोली भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूं। मेरा उद्धार करें। यह सुनकर भगवान विष्णु उन्हें आश्वस्त करते हुए बोले चिंता न करें मैं अवतार लेकर पृथ्वी पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति प्रदान करूंगा। मेरे अवतार लेने से पहले कश्यप मुनि मथुरा के यदुकुल में जन्म लेकर वसुदेव नाम से प्रसिद्ध होंगे। मैं ब्रज मंडल में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से ‘कृष्ण’ के रूप में जन्म लूंगा और उनकी दूसरी पत्नी के गर्भ से मेरी सवारी शेषनाग बलराम के रूप में उत्पन्न होंगे। तुम सब देवतागण ब्रज भूमि में जाकर यादव वंश में अपना शरीर धारण कर लो। कुरुक्षेत्र के मैदान में मैं पापियों का संहार कर पृथ्वी को पापों से भारमुक्त करूंगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान चन्द्र किरण गर्ग, सुरेश चंद बंसल, हरशंकर तायल, भीमसैन कंसल, विजय बंसल, सुनील तायल, अशोक शर्मा, अमरीश सिंघल, अनुए लक्की, मनोज खंडेलवाल, नीरज, कन्नू, कुलदीप, कैलाश, नितिन, शुभम आदि का सहयोग रहा।