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चकबंदी को लेकर दो गांवों के किसान आपस में उलझे

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चकबंदी को लेकर दो गांवों के किसान उलझे
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जानसठ। गांव संभलेहड़ा के किसानों ने चकबंदी अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए चकबंदी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। किसानों ने डीएम से शिकायत का चकबंदी रोकने की मांग की। उधर, गांव गढ़ी मुझेड़ा के किसान चकबंदी कराना चाहते हैं। जिसको लेकर दोनों गांवों के किसान चकबंदी कार्यालय के बाहर आपस में उलझ गए। इस बीच किसानों को समझाकर शांत किया गया।
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ग्राम संभलेहड़ा के दर्जनों किसानों ने ब्लॉक प्रमुख योगेश गुर्जर, ग्राम प्रधान सलमा के नेतृत्व में चकबंदी कार्यालय पर प्रदर्शन कर चकबंदी अधिकारियों पर किसान उत्पीड़न का आरोप लगाया। किसानों का आरोप है कि शासन ने 2006 में गांव में चकबंदी प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन 12 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अधिकारियों द्वारा किसानों का उत्पीड़न लगातार बढ़ता जा रहा है। गांव व क्षेत्र के किसानों ने ग्राम प्रधान सलमा के नेतृत्व में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर गांव की चकबंदी रुकवाने की मांग की थी। उस समय तो गांव की चकबंदी प्रक्रिया रोक दी गई थी। लेकिन चकबंदी विभाग के सीओ के कार्यक्षेत्र बदलते ही दूसरे सीओ ने आकर गांव में चकबंदी प्रक्रिया फिर से शुरू करा दी। जिसको लेकर किसानों में रोष व्याप्त है। प्रदर्शनकारी संभलहेड़ा के किसानों के साथ ही दूसरे गांव गढ़ी मुझेड़ा के किसान भी चकबंदी कार्यालय पहुंच गए। गढ़ी मुझेड़ा के किसान चकबंदी कराने की मांग उठाई। जिसको लेकर दोनों गांवों के किसान उलझ गए। संभलहेड़ा के किसानों ने कहा कि गांव में चकबंदी प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। सीओ चकबंदी गिरीश का कहना है कि एक गांव के किसान चकबंदी का विरोध कर रहे हैं, जबकि दूसरे गांव के किसान चकबंदी कराना चाहते हैं। इन दोनों गांव की चकबंदी का कार्य सीओ सदर देख रहे हैं। कार्यालय पर प्रदर्शन करने वालों में कृष्ण पाल, गुरुबक्श सिंह, प्रवीण कुमार, सलीम, गुलफाम, संजय कुमार, अरविंद आदि किसान शामिल रहे।
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