फाइलेरिया की चपेट में आए तीन बच्चे
मुजफ्फरनगर। वही हुआ जिसका डर था। अब तक अनजान रही फाइलेरिया (हाथी पांव) बीमारी ने अपने पैर जिले में भी पसार लिए हैं। शासन के निर्देश पर चले स्कूली बच्चों की जांच अभियान में तीन मामले पॉजेटिव पाए गए हैं। संक्रमित मिले बच्चों के मामले में आगे की कार्रवाई और उपचार लखनऊ से मिले निर्देशों के अनुसार होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में इस बीमारी का पता लगाने को 12 नवंबर से अभियान चलाया। जिले के 30 स्कूलों के 460 बच्चों के ब्लड सैंपल लेकर किट से मौके पर ही फाइलेरिया की जांच की जानी थी। शुक्रवार तक 431 बच्चों की जांच हो चुकी थी। इनमें से तीन बच्चे फाइलेरिया के पॉजेटिव मिले हैं। इन बच्चों को चिह्नित कर लिया गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह ने बताया कि शुक्रवार को लखनऊ से डा. विकास सिंघल के नेतृत्व में एक टीम जिले में आई थी। पॉजेटिव मिले मामलों में उनसे वार्ता हुई है। उन्होंने इस संबंध में शासन से निर्देश मिलने के बाद अगली कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि पॉजेटिव मिले बच्चों की फिर से जांच की जाएगी।
संक्रमित मच्छर से फैलता है फाइलेरिया
फाइलेरिया संक्रमित मच्छर से फैलने वाली बीमारी है। इस बीमारी का संक्रमण सूबे के पूर्वी जनपदों तथा दूसरे प्रदेशों में फैलता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बीमारी के मामले कम ही सामने आते हैं। चूंकि पूर्वांचल तथा दूसरे प्रदेशों से यहां आकर लोग बसते हैं। फाइलेरिया संक्रमित मच्छर के काटने से परजीवी कीड़े किसी व्यक्ति के रक्त में चले जाते हैं तो वह लिम्फेटिक प्रणाली (नसों और नोड्स) को प्रभावित करते हैं। वयस्क कीड़े लिंफ की नसों में 4-6 साल तक रहते हैं। मादा कीड़ें खून में लार्वा को जन्म देते हैं जिससे इनकी संख्या बढ़ती रहती है।
तीन बच्चे फाइलेरिया के पॉजेटिव मिले हैं। शासन से निर्देश मिलने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी। पॉजेटिव मिले बच्चों को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है। परजीवी लंबे समय तक शरीर में निष्क्रिय रहते हैं। प्रभावित मिले बच्चों का उपचार कराया जाएगा।
- अलका सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी।