मुजफ्फरनगर। शहर में कबाड़ी की दुकानों का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। करोड़ों का कारोबार अवैध रुप से चल रहा है। बड़े कबाड़ियों ने भी जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। बिना पंजीकरण के किसी भी व्यापारी को सरकार द्वारा दिए जाने वाले बीमा आदि का लाभ भी नहीं मिल पाता है। विस्फोट में मरे कबाड़ी नासिर का भी कोई पंजीकरण वाणिज्यकर में नहीं था, इस कारण उसे व्यापारी को मिलने वाला कोई लाभ नहीं दिया जा सकता।
जिले में कबाड़ी का व्यापार बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। मीनाक्षी चौक पर कबाड़ी की कई दुकान ऐसी है, जिनमें साल भर में करोड़ों का व्यापार होता है, लेकिन किसी ने भी आज तक जीएसटी में अपना रजिस्ट्रेशन कराने की जहमत नहीं उठाई है। जहां व्यापारी को इसका लाभ दिखाई देता है, वहीं बड़ा हादसा होने पर इसका बड़ा नुकसान भी है। सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं भी व्यापारी को नहीं मिल पाती है। शहर में कबाड़ियों की सैकड़ों दुकानें हैं। कबाड़ी यहां लोहा खरीदकर सीधे फैक्ट्रियों को बेचते हैं। अभी तक सब व्यापार बिना लिखा पढी के ही चल रहा है। नियम यह है कि बीस लाख से ऊपर के हर प्रकार के व्यापारी को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कबाड़ी की दुकानों पर किसी ने ध्यान हीं नहीं दिया और किसी भी कबाडी ने जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया। भले ही वह करोड़ों का व्यापार कर रहा हो। सरवट में विस्फोट में काल का ग्रास बने कबाड़ी नासिर का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था। पंजीकरण होता तो उसे पुलिस की जांच के बाद व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिल सकता था।
20 लाख से व्यापार पर पंजीकरण जरूरी
मुजफ्फरनगर। डिप्टी कमिश्नर वाणिज्यकर शरद शुक्ला ने बताया कि बीस लाख से ऊपर के व्यापार पर जीएसटी में पंजीकरण जरूरी है। इससे कम में व्यापारी तो रजिस्ट्रेशन करा सकता है, लेकिन हम जबरन नहीं करा सकते। बीस लाख से ऊपर के व्यापार में विभाग की भी जिम्मेदारी है। बिना पंजीकरण के सरकार द्वारा व्यापारियों को दिए जाने वाले लाभ नहीं मिल सकते।