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भाजपा का कदम न्यायपालिका में अविश्वास: सपा

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भाजपा का कदम न्यायपालिका में अविश्वास: सपा
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मुजफ्फरनगर।
सूबे की सरकार द्वारा जिले में हुए दंगों में आरोपियों से मुकदमे वापिस लेने की प्रक्रिया को सपा ने न्याय के विरुद्ध बताया है। कहा है कि यह न्याय पालिका के प्रति अविश्वास की पराकाष्ठा है।
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महावीर चौक स्थित सपा कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता में जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप और पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि मुजफ्फरनगर और शामली जनपद में दंगों से जुडे़ मुकदमे वापिस लेने के लिए आख्या मांगी गई है। यह प्रक्रिया देश की न्याय पालिका में अविश्वास की पराकाष्ठा है। ये मुकदमे गरीब, लाचार, कमजोरों की हत्याओं, उनके घरों में आगजनी और अन्य प्रकार के धनबल के नुकसान से संबंधित हैं। यदि इनमें कोई निर्दोष है तो न्याय पालिका स्वत: ही उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर सकती है। दोषी व्यक्तियों को सजा दिलाना कानून एवं देशहित में है। सरकार का कार्य दोषी को सजा और पीड़ित को न्याय दिलाने का होता है। जघन्य हत्याकांड और आगजनी के मामलों में चुनाव के मद्देनजर रखते हुए निर्णय लेना उचित नहीं है। यह जनतंत्र के भविष्य के लिए खतरा है। भाजपा और उनकी सरकार जनतंत्र और धर्म निरपेक्षता में विश्वास नहीं रखती है। न्याय पालिका का अस्तित्व भी भाजपा सरकार खत्म कर देना चाहती है, जिस पर आम आदमी को उम्मीदें टिकी है। सपा भाजपा सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है। सपा नेताओं ने कहा कि यह पहली बार हो रहा है, जब प्रत्येक किसान के लिए दस हार्स पावर का कनेक्शन जरूरी कर दिया गया है। बिल पर छूट के स्थान पर पेनाल्टी लगाई गई है। पत्रकार वार्ता में चंदन चौहान, नरेश विश्वकर्मा, वसी अंसारी, जिया चौधरी आदि मौजूद रहे।
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