जिले में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे 350 छात्र-छात्राओं को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य परेशानियों के कारण यह स्थिति बनी। इसी के चलते विभिन्न संस्थानों को इन छात्रों के लिए जारी हुआ 65 लाख रुपये वापस करने पड़े।
सरकार उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले दलित छात्र-छात्राओं को प्रतिपूर्ति शुल्क देती है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, जिससे वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। इसके बाद भी अपने परिवार की विषम परिस्थितियों और अन्य परेशानियों के चलते जिले में वर्ष 2016-17 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 350 विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।
जिले के समस्त कॉलेजों में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के साथ व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले दलित छात्रों को सरकार ने प्रतिपूर्ति शुल्क एवं छात्रवृत्ति के रूप में 14 करोड़ रुपया जारी किया था।
समाज कल्याण विभाग ने सभी संस्थाओं को पत्र जारी किया था कि वह उन बच्चों का पैसा वापस कर दें, जिन्होंने किन्हीं कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। जिलेभर से विभिन्न विद्यालयों से जो सूची सामने आई, उसमें यह आंकड़ा सामने आया कि प्रवेश लेने के बाद भी 350 विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।
इन सब बच्चों का जारी 65 लाख रुपया इन संस्थाओं ने विभाग को वापस कर दिया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीबी पांडेय ने बताया कि यह पैसा सरकार को वापस चला जाएगा। जिन बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी, उनके सामने विभिन्न कारण हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के साथ दूसरे सब्जेक्ट में एडमिशन लेने, सरकारी नौकरी लग जाने आदि कारणों से भी पढ़ाई बीच में छोड़ी गई।