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देवबंद में श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मेला आरंभ

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देवबंद (सहारनपुर)। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मेला आरंभ हो गया है। बुधवार को एसडीएम राकेश कुमार और सीओ अजेय शर्मा ने संयुक्त रूप से फीता काटकर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इस दौरान आसमान में रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़ने के साथ शांति के प्रतीक सफेद कबूतर उड़ाकर आपसी सौहार्द कायम रखने का संदेश दिया गया।
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शाम करीब 6.30 बजे अधिकारियों ने विधिवत मेले का उद्घाटन किया। इससे पूर्व अधिकारियों ने श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर जाकर माथा टेका और भगवती मां का आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम में एसडीएम राकेश कुमार ने कहा कि देवबंद हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक है जो पूरे विश्व में जाना जाता है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा व सौहार्द कायम रखने का आह्वान किया। सीओ अजेय शर्मा ने कहा कि मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्राप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। असामाजिक तत्वों पर पुलिस पैनी निगाह रखेगी। यदि कोई गड़बड़ी या किसी के साथ छेड़छाड़ अथवा चोरी आदि की घटना को अंजाम देने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम में एडीजे बिजनौर बलजोर सिंह, तहसीलदार कमलेश कुमार, कोतवाल कुलदीप सिंह, नगरपालिका चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी और मेला चेयरमैन मनोज सिंघल और भाजपा नेत्री शशी त्यागी आदि ने भी विचार रखे। इस मौके पर ईओ विनोद कुमार, पंडित देवीशरण शर्मा, सतेंद्र सिंह धीराणा, महबूब आलम, ऋतुराज सिंह, विक्रम सिंह, विकास चौधरी, नौशाद अली, संजय जैन, मो. आरिफ, नीरज गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
सिद्धपीठ पर प्रसाद चढ़ाने को आज लगेगा भक्तों का तांता : पंडित सतेंद्र
देवबंद। सिद्धपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर पर बृहस्पतिवार (आज) को प्रसाद चढ़ाने के लिए भक्तों का तांता उमडे़गा। इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए हैं। वहीं, समाजसेवी संगठनों ने श्रद्धालुओं की सेवार्थ कैंपों का आयोजन किया है।
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मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि पर सिद्धपीठ पर वार्षिक मेला आयोजित किया जाता है। करीब 15 दिन तक चलने वाले इस मेले में आसपास ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां भगवती के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो उद्घाटन होने के बाद से ही श्रद्धालु भवन पर आना शुरू कर देते हैं, लेकिन बृहस्पतिवार को चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व होने के कारण सुबह चार बजे मंदिर के द्वार खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं की कतारें लगनी आरंभ हो जाएंगी।
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