सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना की
मोरना। एतिहासिक भागवत पीठ शुक्रताल आश्रम में अमावस्या पर सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु के लिए वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। युवतियों ने मंगलकामना के लिए धागा बांधा। इस दिन अखंड सौभाग्य पाने को सुहागिन व्रत रखती हैं। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत को रखा जाता है।
महाभारत कालीन शुक्रताल में गंगाघाट पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। शुकदेव आश्रम में वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए मन्नत का धागा बांधकर दीप प्रज्वलित कर विधि-विधान पूर्वक पूजा अर्चना की। सप्त ऋषि भगवान श्रीकृष्ण भगवान के दर्शन कर परिवार की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की। मंदिर के पुजारी आचार्य सुमन शास्त्री ने बताया कि धर्म में इस व्रत को रखने का खास महत्व है। वट सावित्री व्रत में वट और सावित्री का विशेष महत्व है। इस समय सुहागिन यमराज का भी पूजन करती हैं। वट में ब्रह्मा, विष्णु महेश तीनों का वास है। इसके नीचे सच्चे मन से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सुहागिन व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करके सिंदूर, रोली, चना, अक्षत व वट वृक्ष की जड़ को कच्चे दूध से अभिषेक करती हैं। इसके बाद कच्चे सूत को हल्दी में रंगकर वट वृक्ष को बांध देती है। पूजन करने के लिए हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड आदि जगहों से आई सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु के लिए भाव और आस्था के साथ पूजा अर्चना की। वहीं नगर के दंडी आश्रम, हनुमतधाम, गणेशधाम शिवधाम, दुर्गाधाम, पीतांबरा धाम, महेश्वर आश्रम, गोडिया मठ, शनिधाम आदि के दर्शन कर साधु संतों से आशीर्वाद लेकर सत्संग आदि में भाग लिया।