रालोद की रैली में मौजूद जयंत चौधरी, शरद पंवार और अजित सिंह।
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चरथावल की किसान अधिकारी रैली में जयंत चौधरी ने उप्र में अपना इरादा जता सीधे युवाओं की नब्ज पर हाथ रखा। कहा कि एक वो दौर था, किसान-मजूदर से लेकर खेल-खलिहान तक खुशहाल थे। एक यह दौर है जब पूरा देश कामकाज छोड़कर लाइन में खड़ा है। अन्नदाता, मजदूर अपनी मेहनत की कमाई नहीं ले पा रहा है, अब वक्त बदलाव चाहता है, युवा इसे अच्छी तरह से समझ लें।
रैली में भाषण की शुरुआत जयंत चौधरी ने अपने दादा एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह से की। संस्कारों की दुहाई देने के साथ नौजवानों की नब्ज पर हाथ रखकर मन टटोलने की भरसक कोशिश की। साथ ही बुजुर्गों को बड़े चौधरी की याद दिलाने से भी नहीं चूके। जयंत चौधरी ने कहा कि युवाओं को अब सोचना पड़ेगा, जिन्होंने रोजगार का वादा किया, वह अब रोजगार छीन रहे हैं। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया पर भी सवाल उठाए।
कैश लैस का हवाई ख्वाब दिखाकर जनता को छल लिया है। केंद्र की सरकार अमीरों की तिजोरी भर रही है, देश भुखमरी के कगार पहुंच गया है। इससे उनका कुछ लेना-देना नहीं है। जयंत ने रैली में किसानों को अधिकार याद दिलाए। देश के संसाधनों पर किसान और युवाओं का पहला हक है। जयंत चौधरी ने करीब 25 मिनट तक भाषण दिया, जिसमें अकेले 10 मिनट ने अपने दादा के नाम की और बाकी 15 मिनट युवाओं को समझाने तथा केंद्र सरकार को कोसने में निकालीं।
जज्बातों का हवाला देकर परखा माहौल
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 के बाद यह पहला मौका रहा, जहां एक ही मैदान में जाट और मुस्लिम नेताओं के साथ भीड़ एकत्र हुई। जनतादल सेक्युलर के नेता दानिश अली ने मुस्लिमों पर फोकस कर कहा कि एक बार बहकावे में आकर गलती की गई। अब उसे भुलाने का वक्त है और आने वाले विधानसभा चुनाव में उसे सुधारने का भी मौका है।
रालोद नेता डॉ मसूद ने भी मुस्लिमों का मन जानने में वक्त लगाया। कहा, जाट-मुस्लिम के टूटने का नतीजा ये रहा कि जो पहले सीट मिलती थीं, वह पलभर में खाते से बाहर हो गईं। इसके अलावा टीएमसी के नेता नजिमुलहक ने भी माहौल परखने की कोशिश की जरूर, लेकिन स्थानीयता न होने के कारण कई जगह भाषण में चूकते नजर आए। रालोद ने जज्बातों का हवाला दिया। किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की नीतियों का बखान किया।