मुजफ्फरनगर। जिले की मोरना चीनी मिल घाटे में चल रही है। चीनी मिल ने अतिरिक्त जमे दस कर्मचारियों को भी हटा दिया है। डीएम ने मिल के जीएम को खर्चे कम करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि गन्ने के रस से दूसरे उत्पादों के विकल्पों पर भी ध्यान दिया जाए।
विकास भवन के सभागार में डीएम अजय शंकर पांडेय ने चीनी मिल समिति की प्रबंध कमेटी, समस्त संचालकों के साथ बोर्ड बैठक ली। उन्होंने कहा कि मिल के सभी कार्य पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराए जाएं। बैठक में मिल के घाटे में चलने पर मिल के खर्चों, जिसमें सैलरी सहित अन्य खर्चों आदि को कम करने की बात पर मुख्य प्रबंधक ने बताया कि अनावश्यक 10 कर्मियों को कम कर दिया गया है। मिल में किसानों के अंशदान को सदस्यों के साथ एजीएम में प्रस्ताव रखा जाए। प्रत्येक बैठक में खर्चे कम किए जाने के संबंध में आख्या उपलब्ध कराई जाए। सदस्यों ने कहा कि मिल द्वारा लिए गए टर्म लोन एवं ब्याज की जानकारी उपलब्ध कराएं। मुख्य प्रबंधक ने बताया कि डीसीबी से लोन लिए जाने का कारण उसकी अन्य बैंकों से ब्याज दर कम थी। लोन चुकाने में मिल द्वारा जो बैंक को ब्याज दिया जा रहा है वह ज्यादा है। अन्य बैंकों से कम ब्याज दरों पर लोन लिया गया है।
डीएम ने कहा कि गन्ने के रस से बनने वाले अन्य उत्पादों जैसे सिरका, गुड़, एथेनॉल आदि के विकल्पों पर भी विचार किया जाए। जनपद में रस से बनने वाले सिरके का उत्पाद कर मार्केटिंग कराई जाए। इससे किसानों की आय के संसाधनों में वृद्धि होगी। मिल में सभी अधिकारी कर्मचारी बॉयोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराएं। मुख्य प्रबंधक को निर्देश दिए कि मिल में मैली से कम्पोस्ट खाद बनाने का प्लांट लगाने संबंधी प्रस्ताव बनाया जाए। प्रेस मेड से बायो सीएनजी प्लांट का डेमो दिखाया जाए और इसका प्रस्ताव शासन को प्रेषित करें। डीएम ने कहा कि मिल के विस्तारीकरण के लिए प्रस्ताव, मैली के निस्तारण के लिए बायोगेस प्लांट का प्रस्ताव व एथेनॉल प्लांट का प्रस्ताव शीघ्र उपलब्ध कराए। बैठक में जीएम मोरना चीनी मिल प्रबुद्ध चौबे, डीसीओ आरडी द्विवेदी सहित समस्त संचालक मौजूद रहे।