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भक्ति भरोसे के बिना नहीं होती-महाराज

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भक्ति भरोसे के बिना नहीं होती : महाराज
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मोरना। शुक्रताल के श्रीराम आश्रम में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा के चौथे दिन डॉ. श्याम देवाचार्य महाराज ने कहा कि मंत्र, जप बिना विश्वास में सफल नहीं होते हैं। भक्ति भरोसे के बिना नहीं होती। हमें चाहिए कि भगवान की लीलाओं, सेवकों, कथाओं उपदेशों पर भरोसा करें। आंख खोलने से संसार मिलता है और आंख बंद करने से भगवान के दर्शन होते हैं।
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श्रीराम आश्रम मेें ब्रह्मलीन नेष्टिक ब्रह्मचारी स्वामी रामधारी महाराज की समाधि मंदिर के चरणों में भागवत कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जो सन्मार्ग पर चलते हैं, भगवान उन्हें गोद खिलाते हैं। इसलिए मानव को स्वयं का आसन रास्ता ढूंढना चाहिए। अपने भीतर भगवान पाने की प्यास को जगाओ, तड़प को जगाओ। बस किसी संत के चरण पकड़ लो, तुम्हारे अंदर का बुझा भक्ति का दीया जल उठेगा। जिस जीव में विकार होते हैं, उसके संस्कार किए जाते हैं। जीव का स्वभाव है, वह कई बार प्रभु को सबकुछ अर्पण करने को कहता है, लेकिन करता नहीं। अर्धम की कमाई बड़ी होती है, धर्म की कमाई छोटी होती है। मन को खाली कर लो, ध्यान की स्थिति आ जाएगी। भजन में जो बाधा डाले, उसका साथ छोड़ दो। वियोग में भजन ज्यादा पुष्ट होता है। मोह और प्रेम में यही अंतर है, सच्चे प्रेम की पहचान वियोग में होती है। जो लोग सुख चाहते है, उन्हें दुख मिलेगा। मन जो आप सोच लेते हैं, वह जीवन में प्रेरक बन जाता है। मानव जीवन में यदि भजन अच्छा नहीं लगे, तो निश्चय मन में पाप और मैल से भरा है। इस मैल का छुड़ाने के लिए भगवान को जाप करने से जन्म-जन्म के पापों से मानव को छुटकारा मिल जाता है। कथा के दौरान स्वामी नरसिंह दास महाराज, महंत किशोरी दास महाराज, स्वामी सतीशा नंद महाराज आदि भी उपस्थित रहे। आयोजन में अजनी गौतम, दुर्गा प्रसाद वाजपेयी, हीराधर, सुरेश तिवारी, प्रदीप राय, कौशल दूबे, राधा दीक्षित आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
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