आंबेडकर जयंती पर पहरे में रहा शहर
मुजफ्फरनगर।
आंबेडकर जयंती पर शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे। सुबह से ही शहर के सभी प्रमुख स्थानों पर पुलिस का पहरा नजर आया। जिन स्थानों पर आंबेडकर जयंती के कार्यक्रम हुए वहां प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। संवेदनशील स्थानों पर आरएएफ और पीएसी तैनात रहे। जयंती के आयोजन पर किसी पर कोई रोक नहीं लगाई गई।
दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुए उपद्रव की घटना को लेकर जिले में आंबेडकर जयंती पर सभी का निगाहें थी, इसीलिए प्रशासन की ओर से विशेष सुरक्षा व्यवस्था रही। शहर समेत जिलेभर में आरएएफ, पीएसी के साथ काफी संख्या में पुलिस बल संवेदनशील स्थानों पर तैनात रहा। जिला प्रशासन ने आंबेडकर जयंती के किसी कार्यक्रम पर कोई रोक नहीं लगाई। शहर की दलित बस्तियों में जहां बड़ी संख्या में कार्यक्रम आयोजित किए गए। भाजपा ने जयंती को सामाजिक समरसता दिवस के रूप में मनाया। जिला प्रशासन ने भी अलग से कार्यक्रम आयोजित किया। सभी स्थानों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। शहर के शिवचौक, कलेक्ट्रेट और दलित बस्तियों में सुरक्षा को लेकर खास फोकस रहा। पूरे जिले में शांति और सौहार्द के साथ आंबेडकर जयंती की कार्यक्रम मनाया गया।
पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को वापस भेजा
मुजफ्फरनगर। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष उपकार बावरा और अन्य लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में आंबेडकर जयंती पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने वालों को पुलिस ने अलमासपुर चौराहे पर ही रोक दिया।
अलमासपुर गांव के भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष उपकार बावरा और अन्य दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ की कार्रवाई का विरोध किया। सुबह के समय बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष अलमासपुर में एकत्र होकर सिर पर काली पट्टी बांधकर कचहरी की ओर रवाना हुए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। नईमंडी पुलिस ने कहा कि वह आंबेडकर जयंती मना सकते हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शन धारा 144 में नहीं होगा। काली पट्टी बांधकर कचहरी में आंबेडकर की प्रतिमा पर पहुंचने की इन दलितों की मांग को पुलिस ने खारिज कर दिया। विरोध कर रहे दलितों को वापिस अपने घरों को लौटना पडा। पुलिस ने शहर में चौतरफा चौकसी बरती।