अपराजिता : महिलाओं ने चिकित्सकों से की ‘मन की बात’
मुजफ्फरनगर। अमर उजाला के अभियान अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। सरकुलर रोड स्थित मदर्स प्राइड स्कूल में आयोजित शिविर में महिला चिकित्सकों से महिलाओं ने खुलकर बात की। चिकित्सकों ने भी उन्हें स्त्री रोगों के कारण, लक्षण और निवारण बताते हुए अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह दी। कार्यक्रम में शामिल महिला सशक्तिकरण पर भी विचार रखे गए। महिलाओं ने विभिन्न समस्याओं पर सवाल भी पूछे।
मंगलवार को मदर्स प्राइड स्कूल में आयोजित शिविर में होम्योपैथी डाक्टर्स एसोसिएशन की ओर से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गई। महिला चिकित्सक डा. सुषमा कश्यप और श्रुति बेदी ने काउंसिलिंग की। उन्होंने बताया कि महिलाओं में रसोली के मामले इन दिनों बहुत सामने आ रहे हैं। इसके अलावा स्वेत प्रदर और पीसीओडी की बीमारी से भी अनेक महिलाएं पीड़ित रहती हैं। छाती में गांठ की समस्या भी आम सी हो चली है। बताया कि मुख्य समस्या यह है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क नहीं रहती। छोटी-मोटी बीमारी पर ध्यान नहीं देतीं, जो आगे चलकर बड़ा रूप धारण कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि एलोपैथी में रसोली, छाती में गांठ आदि के उपचार के लिए ऑपरेशन ही एकमात्र तरीका होता है, लेकिन होम्योपैथी में दवाओं के माध्यम से भी उपचार किया जा सकता है। महिलाओं ने विभिन्न समस्याओं पर सवाल भी पूछे। चिकित्सकों ने उनके प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। शिविर में स्कूली छात्र-छात्राओं की माताओं के अन्य अन्य महिलाएं भी शामिल हुईं।
बेहतर रखें खानपान, करती रहें व्यायाम
मुजफ्फरनगर। काउंसिलिंग के दौरान होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. श्रुति वेदी और डा. सुषमा कश्यप ने बताया कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत नहीं रहतीं। खानपान में बदलाव और थोड़ा व्यायाम उन्हें कई बीमारियों से बचा सकता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की अधिकांश बीमारी हार्मोन की गड़बड़ी से होती हैं। महिलाएं पोषक भोजन लें तथा नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है। व्यक्तिगत सफाई रखें। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को लेकर टालमटोल न करें, तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
स्वास्थ्य की जांच कर दी दवाइयां
मुजफ्फरनगर। शिविर में काउंसिलिंग में करीब 107 महिलाएं शामिल हुईं। 20 को विभिन्न समस्याएं सामने आईं। चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य की जांच कर दवाइयां दीं। शिविर में होम्योपैथी एसोसिएशन से डा. प्रवेश कुमार, डा. विवेक कुमार, डा. हिमांशु, डा. प्रमोद कश्यप भी मौजूद रहे। कृति अहलावत मलिक, प्रीति सहरावत, प्रियंका कालरा, मनप्रीत कौर, पिंकी चौधरी, पूजा राठी, आकांक्षा जैन, स्वाति राठौर, सरिता, नीरा मलिक आदि शामिल हुईं।
नारी तू अबला नहीं, इस धरती का आधार है
मुजफ्फरनगर। शिविर में शामिल महिलाओं ने नारी सशक्तिकरण को लेकर अपने उद्गार व्यक्त किए। स्कूल संचालिका रिंकू एस गोयल ने महिलाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने को कहा। असिस्टेंट प्रोफेसर पूर्वी ने - तुझसे ही सारा जीवन, तुझसे ही संसार है। नारी तू अबला नहीं, इस धरती का आधार है कविता प्रस्तुत की। महिलाओं ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए शपथ पत्र भी भरे।
- महिला दिवस अपनी विशेषताओं का दर्शाने का दिन होता है। यह केवल एक ही दिन सीमित नहीं होना चाहिए। हर किसी में कुछ न कुछ क्वालिटी है, इसलिए उसे सबके सामने लाएं। - पूर्वी, असिस्टेंट प्रोफेसर।
- यह सच है कि महिलाएं घर-परिवार में उलझकर अपने लिए समय नहीं निकाल पातीं। इस परिपाटी को बदलने की जरूरत है। महिलाओं को अपने लिए भी समय निकालना चाहिए। - प्रियंका।
इस तरह के काउंसिलिंग कार्यक्रम महिलाओं में जागरूकता लाने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की बेहद आवश्यकता है। - श्वेता शर्मा।
- सबके स्वास्थ्य का ध्यान रखने वाली महिलाएं अपना ही ख्याल नहीं रख पातीं। मेरा तो यही कहना है कि महिलाएं अपने लिए भी समय निकालें और अपने लिए भी जिएं। - ऋतु।
- महिलाओं को अपने निर्णय स्वयं लेने चाहिए। इससे उनमें आत्मनिर्भरता की भावना आएगी। हम हर मामले में परिवार पर निर्भर रहती हैं। थोड़ा आगे बढ़कर अपने आपको भी पहचानें। - ममता गौतम।
- वक्त बदल रहा है, लेकिन समाज में महिलाओं की स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हो रहा। आज भी बहुत बड़ा तबका ऐसा है जिसमें महिलाएं रुढ़िय़ों में जकड़ी हुई हैं। इन बेड़िय़ों को तोड़ने की जरूरत है। - सोनी।