दलित महिला के आत्महत्या प्रकरण में पुलिस सवालों के कटघरे में है। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की तो सुनी ही नहीं, बल्कि पुराना मामला बता कर साथ आए पति और बेटे को हवालात में डाल दिया। कानून का यह राज देख महिला इतनी टूट गई कि उसने फांसी लगा कर जिंदगी गवां दी।
जिले के फुगाना थाने के पूरे मामले के तथ्य यही साबित कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी ने उसकी सुनने के बजाए परिवार के बीच पहले से रास्ते के विवाद से जुड़े मुकदमे में सवाल जवाब खड़े कर दिए। हद तो तब हो गई, जब पीड़िता के साथ आए पति और बेटे को दरोगा ने हवालात में बंद कर दिया। इंसाफ क्या मिलता, पीड़िता खुद गुहार करने के झमेले में फंस गई। उसकी एक नहीं सुनी गई। जब उसने दुष्कर्म के प्रयास के आरोपियों सुभाष और प्रदीप को ही थाने में पुलिस वालों के साथ बातों में मशगूल पाया, तो वह बुरी तरह टूट गई। अब उसे अपनी तहरीर की नहीं, बल्कि पति और बेटे की रिहाई की चिंता सता रही थी। पुलिस की संवेदनहीनता से बेजान हो चुकी दलित महिला भट्ठे पर लौट आई। इंसाफ की कोई राह नहीं दिखी तो उसे जान गंवाने को मजबूर होना पड़ा। मृतका भले ही भट्ठे की मजदूर थी, लेकिन उसने सुसाइट नोट लिखा और पुलिस तथा आरोपियों को कटघरे में खड़ा किया। सवाल यह है कि आखिर महिला की आत्महत्या के बाद पुलिस ने किस कानून के तहत हवालात में बंद उसके पति और बेटे को रिहा कर दिया। क्या पुलिस दुष्कर्म के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज ना करनी पड़ी, इसके लिए उसके पति और बेटे को हिरासत में रखे थी। जिस मुकदमे में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, वह पुराना है और दो भाइयों के बीच रास्ते का विवाद है। यदि उनका जुर्म इतना संगीन था, तो पुलिस ने पीड़िता के मामले से पहले उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया था। साफ है कि पुलिस की मंशा में खोट था। आरोपी कैसे थाने में घूमते रहे, जबकि पीड़िता उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने आई थी। बड़े अफसरों की मातहत के खिलाफ कार्रवाई हुई, लेकिन तब, जब निर्दोष पीड़िता ने आत्महत्या कर ली। मां की मौत के बाद इस परिवार का क्या होगा, इसका जवाब क्या पुलिस प्रशासन के पास है।
सीओ बुढ़ाना को दी गई जांच
मुजफ्फरनगर। दलित महिला आत्महत्या प्रकरण में एसपी देहात अजय सहदेव ने कहा कि पूरे मामले की सीओ बुढ़ाना हरिराम यादव को सौंपी गई है। त्वरित कार्रवाई में हल्का इंचार्ज को निलंबित किया गया है तथा दो मुख्य आरोपियों सुभाष तथा प्रदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवार का दर्द सुनेंगे सांसद
मुजफ्फरनगर। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान ने कहा कि फुगाना थाना क्षेत्र के गांव में दलित महिला के आत्महत्या करने की घटना दुखद है। पुलिस ने पीड़िता के दर्द को सही तरीके से समझा होता तो उसे मजबूरन जान नहीं देनी पड़ती। एसएसपी से वार्ता कर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया है। पीड़ित परिवार के गांव पहुंच कर उनके दर्द को सुना जाएगा।
-