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सीएम योगी ने बढा दी शुक्रताल की उम्मीदें

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मुजफ्फरनगर। सीएम योगी के पौराणिक तीर्थ शुक्रताल को धार्मिक पर्यटन के रुप में विकसित करने की कार्य योजना बनाए जाने के संकेत से नई आशाएं जगी हैं। ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से शुक्रताल वेस्ट यूपी का प्रमुख तीर्थ स्थल है, लेकिन सरकारों की उदासीनता की वजह से शुकतीर्थ उपेक्षित रहा है। वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज ने अपने अथक परिश्रम से शुक्रताल को भारत के तीर्थ मानचित्र स्थापित किया।
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जीआईसी में चुनावी रैली में शनिवार को आए सीएम ने शुक्रताल को धार्मिक पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने की मंशा जाहिर की है। योगी सरकार में शुकतीर्थ के विकास को लेकर एक कार्य योजना भी तैयार की है। सीएम के इरादों ने मूर्तरुप लिया तो शुक्रताल की देश में विशेष पहचान बनेगी। शुक्रताल श्रीमद्भागवत कथा की उद्गम स्थली है। पांडवों के वंशज महाराजा परीक्षित को भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम स्थित अक्षय वट वृक्ष की छांव में व्यासनंदन महर्षि शुकदेव मुनि ने भागवत कथा सुनाकर मोक्ष प्राप्ति कराई थी। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महाभारत कालीन शुकतीर्थ पतित पावनी गंगा के तट पर स्थित है। हस्तिनापुर वन्य अभ्यारण्य के वन क्षेत्र में बसी धार्मिक नगरी में वर्ष भर श्रद्धालु भागवत कथा श्रवण के लिए पहुंचते हैं।
वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज ने वर्ष 1944 में शुक्रताल के जीर्णोद्धार का शुभारंभ किया। देश के भागवत विद्वान और कथा व्यास तीर्थ में भागवत सप्ताह कर चुके हैं। बड़े राजनीतिज्ञ भी यहां समय-समय पर आते रहे हैं, मगर शुक्रताल का चहुंमुखी विकास नहीं हो पाया। सड़क, बिजली, गंगा तट और जनसुलभ विकास कर्मयोगी संत कल्याणदेव के अथक प्रयास से ही हो पाया। एमडीए के बजट से शुकतीर्थ सौंदर्यीकरण अवश्य बढ़ा। हाल ही में गंगा तट आदि क्षेत्र में पांच हाईमास्क लाइटें और आधुनिक शौचालय का निर्माण हुआ। प्राकृतिक सौंदर्य और शांति की अनुभूति इस तीर्थ की दिव्यता का अहसास कराती है। साल में कार्तिक पूर्णिमा, ज्येष्ठ गंगा दशहरा सहित यहां चार गंगा स्नान मेले लगते हैं। यूं तो शुकतीर्थ में 50 से ज्यादा मंदिर हैं, पर श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कुछ में ही है। श्री शुकदेव आश्रम, हनुमतधाम, दंडी आश्रम में ही भागवत भक्त आसरा पाते हैं। अलग-अलग समाज की धर्मशालाएं भी हैं। योगी सरकार ने पहल की तो निश्चित ही शुक्रताल की तस्वीर बदलेगी।
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विकास बोर्ड के गठन को योगी से मिले थे ओमांनद
फोटो...
मुजफ्फरनगर। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने तीस जून को लखनऊ में मुुख्यमंत्री आवास पर योगी आदित्यनाथ से शुकतीर्थ के विकास के संदर्भ में भेंट की थी। प्रमुख सचिव धर्मार्थ एवं पर्यटन महानिदेशक अवनीश अवस्थी की मौजूदगी में स्वामी ओमानंद ने सीएम को शुक्रताल विकास बोर्ड के गठन का सुझाव दिया था। स्वामी ओमानंद ने कहा कि महाभारत कालीन कुरुक्षेत्र की तर्ज पर शुक्रताल में विकास बोर्ड के गठन से प्रदेश सरकार पौराणिक तीर्थ को सही रुप में विकसित कर पायेगी। हरिद्वार के उत्तराखंड में जाने के बाद शुक्रताल पश्चिम का प्रमुख तीर्थ है।

बहे अविरल गंगा, विकसित हों जन सुविधाएं
मुजफ्फरनगर। शुकतीर्थ में गंगा की निर्मल धारा बहने से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढे़गी। नमामी गंगे योजना के तहत केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की सीमा से शुक्रताल तक गंगा की सफाई का कार्य प्रारंभ कराया है। गंगा तट की स्वच्छता और स्नान के लिए सुविधा की जरूरत है। बुनियादी सुविधा के साथ सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, पानी की निकासी और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति आवश्यक है। कूड़ा निस्तारण प्लांट के लिए भूमि का चयन नहीं हो पाया है। नक्षत्र वाटिका की तरह नये पार्क विकसित हों। कारगिल शहीद स्मारक को भव्य रुप दिया जाए। सालों से बंद पड़े पर्यटन विभाग के गेस्ट हाउस को पुन: शुरु किया जाए। सुरक्षा की दृष्टि से वर्षो से प्रस्तावित थाना लंबित है। मिनी स्टेडियम, इको पार्क, डाक्यूमेंट्री हॉल आदि बन सकते हैं।
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