मोरना (मुजफ्फरनगर)।
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि जीवन में सुख की प्राप्ति के लिए धर्म और मर्यादा का पालन करें। भागवत का चिंतन प्राणी मात्र में नवचेतना को जाग्रत करता है।
शुक्रताल स्थित श्री शुकदेव आश्रम में रविवार को कथाव्यास अर्जुन राम की भागवत कथा का शुभारंभ स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया। कहा कि भागवत शब्द ब्रह्मा है। भागवत के चिंतन, मनन से प्राणियों में नवचेतना की अनुभूति होती है। भागवत मोह के सिंधु को पार करने की नाव है। भागवत से सांसारिक कुरीतियां तथा कुप्रथाएं दूर होती है। जीवन में आत्मिक आनंद और सुख को धर्म तथा मर्यादा का पालन करना चाहिए। भक्ति में समर्पण की भावना होती है। जहां कुछ लेने की इच्छा है, वहां भक्ति नहीं, मोह है। निष्काम भक्ति में ही आनंद आता है। जहां भक्ति है, वही भगवान है।
कथाव्यास अर्जुन राम ने कहा कि सच्चे संतों के दर्शन दुर्लभ है। दर्शन हो भी जाए, सेवा अति दुर्लभ है। सेवा लाभ मिल भी जाए तो संपूर्ण श्रद्धा पाना बहुत ही कठिन है। यज्ञमान राजस्थान भीलवाड़ा के भगचंद्र बाहेती ने विधि विधान से पूजन किया। भक्ति भाव से कलश यात्रा निकाली गई। जगदीश चंद्र, पवन कुमार, सावित्री, मनोज बाहेती आदि ने भाग लिया।