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पुलिस अभिरक्षा पर नहीं भरोसा, कुख्यात चाहे वीडियो कांफ्रेसिंग

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मुजफ्फरनगर। कुख्यात विक्की त्यागी और अब बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेल में बंद बड़े अपराधियों को पुलिस अभिरक्षा मौत का फंदा दिखने लगी है। गैंगवार और रंजिश में हत्याओं के नए ट्रेड से बेचैन बदमाश वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी को महफूज समझ रहे हैं। सागर मलिक, रोबिन त्यागी, अनिल दुजाना जैसे बदमाशों ने पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट में पेशी को नकार दिया है। मैनपुरी जेल में निरुद्ध संजीव जीवा और बदायूं जेल में बंद विनोद बावला वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए न्यायालय में आवेदन कर चुके हैं।
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कोर्ट में पेशी के लिए झांसी जेल से लाए गए मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल की चाहरदीवारी भी मौत से नहीं बचा सकी। बदमाशों में एक दूसरे को ठिकाने लगाने का यह दुस्साहस पहली बार तब सामने आया, जब वेस्ट यूपी के कुख्यात विक्की त्यागी को कोर्ट में ढेर कर दिया गया था। मामला 16 फरवरी 2015 का है, जब फुगाना थाने के गांव बहावड़ी के सागर मलिक ने वकील का भेष धारण कर मुजफ्फरनगर कोर्ट में विक्की को गोलियों से भून दिया था। साढ़े तीन साल से सागर मलिक पहले बनारस और अब नैनी जेल में बंद है। उसकी कोर्ट में पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से हो रही है। विक्की त्यागी मर्डर में आरोपी सागर के भाई सौरभ मलिक की गत दो जुलाई को मेरठ जेल से यहां कोर्ट में पेशी हुई, तो उसने सुरक्षा के लिए बुलट प्रुफ जैकेट पहन रखी थी। छपार में खाद व्यापारी संजीव त्यागी और उसके भाई राजीव त्यागी हत्याकांड में आरोपी अनिल दुजाना और रोबिन त्यागी भी हमले के डर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर वीडियो कांफ्रेंसिंग का रास्ता चुन चुके हैं।
दस अक्तूबर 2014 में मंसूरपुर थाना क्षेत्र में हाइवे स्थित धौला पुल पर कोर्ट में पेशी के बाद बुलंदशहर जेल जाते वक्त पुलिस अभिरक्षा में रोबिन त्यागी पर एके-47 से अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें सिपाही नरेंद्र की मौत हो गई, जबकि एक दरोगा और सिपाही घायल हो गए। हमले के पीछे विक्की त्यागी गैंग का हाथ सामने आया था। एक लाख के इनामी रहे विनोद बावला को नोएडा पुलिस ने पकड़ा था। फिलहाल बदायूं जेल में शिफ्ट बावला ने वीडियो कांफ्रेसिंग को कोर्ट में अर्जी दी थी। गाजीपुर के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के आरोपी संजीव जीवा ने भी अपनी सुरक्षा के मद्देनजर न्यायालय में वीडियो कांफ्रेसिंग की गुहार लगा रखी है। जीवा इस वक्त मैनपुरी जेल में पूर्व मंत्री ब्रहमदत्त द्विवेदी के हत्या में आजीवन कारावास भुगत रहा है।
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पुलिस अभिरक्षा में अपराधियों की हत्या के मामले तेजी से बढ़े है। अदालत में पेशी के बाद पुलिस अभिरक्षा में पीलीभीत जेल जाते समय कुख्यात आसिफ जायदा को मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर ही गोलियों से भून दिया गया था। वर्ष 2016 में जिला कारागार में ही बदमाशों ने बंदी चंद्रहास की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। पुलिस अभिरक्षा ही नहीं, अब तो जेल के बाहर इलाज कराने से भी बड़े कुख्यात बचने लगे हैं। मुन्ना बजरंगी से जुड़े वायरल ऑडियो में झांसी जेल के डॉक्टर से बातचीत में बजरंगी का पैरोकार कहता है कि बाहर जिंदा बचेंगे, तभी तो इलाज कराएंगे।

जेल से ही कोर्ट में पेशी
मुजफ्फरनगर। जिला कारागार में वीडियो कांफ्रेसिंग की व्यवस्था की गई है। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 167 के वारंट पर प्रतिदिन बंदियों की वीडियो कांफ्रेसिंग से कोर्ट में पेशी कराई जाती है। हत्या, लूट, अपहरण, रंगदारी और गैंगस्टर के मामलों में आरोपी कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बड़े अपराधी वीडियो कांफ्रेसिंग को सुरक्षित मान रहे हैं।
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