ज्ञान और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाते
मोरना।
मां बगलामुखी पीतांबरा धाम शुक्रताल में जयंती महोत्सव को लेकर रामलीला का आयोजन किया गया। चित्रकूट से पधारे कलाकारों ने सुंदर प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस मौके पर धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, माता सीता की विदाई आदि का भावुक नाटक मंचन हुआ। वहीं, कथा व्यास स्वामी यनेंद्र पाठक महाराज ने कहा कि जो सावधान हो करके घर में भक्ति करता है, उसको घर में भी भगवान के दर्शन हो जाते हैं।
तरण तारिणी मां गंगा के पवित्र तट पर पांडव कालीन प्राचीन माता पार्वती मंदिर के परिसर में स्थित 81 फीट ऊंची मां बगलामुखी के वार्षिक जयंती समारोह में स्वामी यनेंद्र महाराज ने कहा कि जीव जहां जाता है, वहां सुख को समझ कर फंस जाता है। ज्ञान और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाते हैं। ज्ञान और भक्ति वैराग्य से दृढ़ होते हैं। वासना के अधीन होकर मानव सुख भोगता है। कोई संत जब कृपा करके दीक्षा देता है, तो मानव देव हो जाता है। रात में आश्रम में आदर्श रामलीला मंडल चित्रकूट के कलाकारों ने सीता स्वयंवर के दौरान धनुष यज्ञ का सुंदर मंचन किया और भगवान राम के द्वारा धनुष को तोड़कर सीता माता के स्वयंवर कर अयोध्या नगरी ले आए, जहां पर नगरवासियों ने मंगल गीत गाए। इस मौके पर महंत संदीप द्विवेदी, देवेंद्र, हरिशंकर, योगेश तिवारी, रामुनागा, अवधेश व्यास, रमाशकंर, पुष्पेंद्र, अजय, सन्न, अजूबा आदि ने मुख्य भूमिका निभाते हुए रामलीला का सुंदर मंचन कर सबका मन मोह लिया। इस मौके पर स्वामी अयोध्या प्रसाद महाराज, प्रमोद शर्मा, सुमन शर्मा, अमरीश, लीलावती, विनोद शर्मा आदि उपस्थित रहे।