मौलाना नजीर अहमद को दो साल तक मिली थी वाई श्रेणी की सुरक्षा
खतौली (मुजफ्फरनगर)। गांव कवाल के हत्याकांड के बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम कराने की पहल के लिए तत्कालीन सपा सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जानसठ के मौलाना नजीर अहमद को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी थी। इतना ही नहीं सपा सरकार में गांव कवाल में जाने से रोकते हुए उन पर पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था। दंगों के दौरान करीब दो साल तक मौलाना वाई श्रेणी की सुरक्षा में रहे। मौलाना को यह सुरक्षा खुद उस वक्त सीएम अखिलेश यादव ने विशेष विमान भेजकर लखनऊ बुलाया था। मेहमान नवाजी के बाद उनको वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। मेरठ के परतापुर में विशेष विमान भेजा गया था। मौलाना को सीएम से मिलने के लिए दिल्ली के रहने वाले कांग्रेसी नेताओं ने अगवानी की थी।
जानसठ के गांव कवाल में वर्ष 2013 में 17 अगस्त में बाइक और साइकिल की भिड़ंत को लेकर हुए संघर्ष में मलिकपुरा के ममेरे भाई सचिव व गौरव की हत्या कर दी गई थी। इस संघर्ष में कवाल निवासी सलीम का पुत्र शाहनवाज भी मारा गया था। इसके बाद क्षेत्र के हालात बिगड़ऩे प्रारंभ हो गए थे। वर्ष 2013 में तीन दिसंबर को जानसठ के मोहल्ला गंज में स्थित मदरसा तालीममुल कुरान के मौलाना नजीर अहमद कासमी क्षेत्र के काफी संख्या में मुस्लिम समाज को लेकर कवाल में जाने लगे। पुलिस प्रशासन को इसकी खबर लग गई थी। प्रशासन ने कवाल जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस को तैनात कर दिया था। जानसठ में ही खतौली तिराहे पर पुलिस ने नाकेबंदी कर दी थी। कवाल जाने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ उस वक्त मौलाना की काफी जद्दोजहद हुई। इसके बाद पुलिस ने मौलाना सहित कई लोगों के विरुद्ध धारा 144 का उल्लंघन करने का मुकदमा दर्ज किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने क्षेत्र में शांति कराने के लिए विशेष विमान मेरठ में भेजकर मौलाना को लखनऊ में बुलवाया। इस विमान में दिल्ली के रहने वाले कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेता आए थे। सीएम यादव ने लखनऊ में मौलाना से बातचीत के दौरान मेहमाननवाजी की थी। लखनऊ से लौटते ही तत्कालीन सीएम अखिलेश ने मौलाना को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी।