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जेटली की पोटली से निकली रसोई की मुसीबत

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कॉस्मेटिक व घरेलू संसाधनों पर महंगाई का बोझ
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मुजफ्फरनगर।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की पोटली से मुसीबत में इजाफा होने वाला बजट आया है। गृहणियों ने बजट को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने महिलाओं के सजने-संवरने की वस्तुओं पर भी महंगाई कर दी है। खाने-पीने से लेकर कॉस्मेटिक, परफ्यूम, डियोडेंट के साथ कई चीजों के दाम अब आसमान पर चढ़ेंगे। इसके अलावा रसोई का गणित भी बिगडऩे वाला है। स्वाद के तड़के में मसालों की मार पड़ेगी। सबसे अधिक मार उन लोगों पर पड़ऩी है, जो इनकम रिटर्न भरते हैं, क्योंकि लिमिट नहीं बढ़ने का असर रसोई के अलावा कई तरह से प्रभाव डालेगा।
आम बजट में गृहणियों को राहत की उम्मीद बंधी थी, मगर सरकार ने स्वाद में महंगाई का तड़का लगा दिया है। डीजल-पेट्रोल पर भले ही एक्साइज ड्यूटी घटाई हो, मगर जीएसटी लगने से स्थिति स्थिर होगी। जीएसटी लागू होने के कारण केंद्र सरकार ने वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स का खुलासा नहीं किया है। खाद्य सामग्राी के दाम बढ़ने के आसार है। जेटली की पोटली से निकली नाउम्मीदें ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया। होटल, रेस्तरां में खाने पर पहले ही जीएसटी की दर 12 और 18 प्रतिशत तक लागू है। ऐसे में परिवार के साथ लंच-डिनर करना होटलों में महंगा है। पैकेड फूड भी सस्ते नहीं है। आम बजट में फ्रूट जूस, सब्जियां महंगी होगी। गृहणियों ने कहा कि पहले रसोई का बजट 7 से 9 हजार रुपये में संभल जाता था, अब ऐसा नहीं रहेगा। सब्जियों के महंगा करने और अन्य खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से स्थिति अधिक खराब होगी। रसोई का बजट उन लोगों के ज्यादा भारी रहेगा, जो इनकम रिटर्न भरते हैं। इन लोगों को लिमिट बढ़ने की आम बजट से आशा थी, मगर सरकार यह नहीं कर सकी है। जिसके चलते अब रसोई का बजट 10 से 14 हजार रुपए तक प्रमिमाह खर्च होने की संभावनाएं हैं, जबकि मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग पर महंगाई का असर अधिक पड़ेगा।
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फर्नीचर, गद्दे भी होंगे काबू से बाहर
मुजफ्फरनगर। रसोई के साथ आम तौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले गद्दे और फर्नीचर भी हालत खस्ता करने वाले हैं। वित्त मंत्री के बजट में इन वस्तुओं को महंगा करने की घोषणा ने गृहणियों को नागवार गुजरा है। सबका साफ मत है कि यह बजट किसी भी सूरत में आम हित में नहीं है। सरकार ने अपना सोचा है, जनता को कोई राहत नहीं दी गई।
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उम्मीदों पर खरा नहीं है आम बजट
- शहर निवासी सुमन बालियान कहती हैं कि मोदी सरकार ने गृहणियों के लिए बजट में कुछ खास नहीं रखा है। इससे तो रसोई का बजट बिगड़ेगा। केंद्र सरकार ने कॉस्मिेटिक सामान के दामों में वृद्धि करने के संकेत दिए हैं। यह महिला वर्ग पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है।
- मीका विहार निवासी सृष्टि ने कहा कि रसोई को कोई राहत नहीं दी गई है। क्रॉकरी, बर्तनों के साथ खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे। गैस में मामूली कटौती की गई है, जो घरेलू बजट के लिए काफी नहीं है। बजट से उम्मीदें थी, मगर सरकार ने निराश किया है।
- प्रेमपुरी निवासी अंजलि मित्तल ने कहा कि आम बजट से रसोई में महंगाई का तड़का लगेगा। केंद्र सरकार ने राहत देेने के बजाए मुसीबत बढ़ा दी है। बजट में मध्यम और निम्न वर्ग का ख्याल नहीं रखा गया है। सरकार की नीति से दाल, तेल के साथ अन्य चीजों महंगा होंगे।
- गांधी कालोनी निवासी इति भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार का आखिरी बजट उम्मीदों पर खरा नहीं है। महिला, बेटियां कुछ नया चाहती थी, लेकिन सरकार ने निराश किया है। रसोई का बजट बिगड़ेगा। अब बच्चों के साथ बाहर खाना खाने से पहले सोचना पड़ेगा।
- प्रेमपुरी निवासी रुचि अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी लगाकर पहले की मसालों, पैकेड़ भोजन, कच्चा सामान, पनीर आदि महंगा है। अब बजट ने और तड़का लगा दिया है। इससे तो खाने का स्वाद बिगड़ेगा। कुछ चीजों में राहत देकर सरकार ने कोई खास कदम नहीं उठाया है।
- संजय मार्ग निवासी सीमा रानी बोलीं कि गृहणियों के लिए रसोई सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन बजट ने निराश किया है। यह बजट अधिक भार बढ़ाने वाला है। जो मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगाई के बोझ तले दबा देगा।
- गांधी कालोनी निवासी अंजू अरोरा ने कहा कि केंद्र सरकार को निम्न और मध्यम वर्ग के लिए विशेष योजना लानी चाहिए थी। गैस के दाम आसमान छू रहे हैं, अब अन्य खाद्य सामग्री भी महंगी होंगी। इससे अधिक प्रभाव पड़ेगा। बजट पूरी तरह से निराशाजनक है।
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- शहर निवासी प्रीति कुकरेजा ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य खर्च बहुत है। ऐसे में रसोई को सीमित चलाना पड़ता है, मगर बजट से महंगाई कम होने के बजाए बढ़ती दिख रही है।
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