जिसका इंतजार था वह 17 साल बाद लौटा
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। सत्रह साल बाद लापता इंतजार के घर लौटने पर परिवार में ईद जैसी खुशियां छा गई। उनके पिता याकूब को लापता बेटे की आने की उम्मीद खत्म हो गई थी। मां सदमे में दम तोड़ चुकी थी। ऐसे में अचानक इंतजार के आने पर पूरे मोहल्ले में जश्न का आलम हो गया।
चरथावल कस्बे के मोहल्ला तगायान मुस्लिम निवासी याकूब साप्ताहिक पैंठ में गांवों में सब्जी विक्रेता है। उनके चार पुत्र इंतजार, इस्तखार, हारूण, दिलनवाज और तीन बेटियां तब्बसुम, रूबीना और जैनब है। सबसे बड़ा पुत्र इंतजार उर्फ धड़ा (16) घर से वर्ष 2002 में लापता हो गया था। कई साल तक उसे तलाश करने के बाद परिजनों में उसके आने की उम्मीद खत्म हो गई थी। मंगलवार रात करीब 12 बजे युवक ने घर का दरवाजा खुलवाया, तो परिवार के सदस्यों को गेट पर इंतजार को देखकर विश्वास नहीं हुआ। पिता और भाई उसके साथ गले लग गए। परिजनों के खुशियों के आंसू टपकने लगे। बुधवार को खबर मिलने पर लोगों की भीड़ देखने को आतुर हो गई। घर लौटने पर इंतजार ने बताया कि वह ट्रेन में बैठकर मुंबई चला गया था। वहां वह शॅापिंग मॉल में एक जिम में गार्ड की नौकरी करने लगा था। वहीं पर कमरा लेकर रहने लगा। हालांकि वह चरथावल की तमाम बातें भूल गया था। वार्ड सभासद राशिद बताते हैं कि युवक को सिर्फ कस्बे का नाम चरथावल और पूर्व चेयरमैन फतेहदीन की बैठक याद थी। एक हफ्ते से मां की याद आने पर घर वापस आया है। इंतजार करीब 10 साल पहले मुंबई से चरथावल में लैंडलाइन नंबर पर उसने फोन करके बातचीत करनी चाही, लेकिन संबंधित व्यक्ति ने उसकी मां, भाई अथवा पिता आदि से बात नहीं कराई, जिससे निराश होकर घर की उम्मीद खत्म हो गई। उधर, पिता याकूब ने बताया कि अब बेटे की उम्मीद छोड़ दी थी। हालांकि ईद से पहले बेटे को घर भेजकर अल्लाहताला ने नायाब तोहफा दिया है। बिछड़े बेटे की सलामती दुआ करने वाली उसकी मां आमना सवा साल पहले सदमे में दम तोड़ चुकी है।