वेद की ज्योति जलती रहे, ओम का झंडा ऊंचा रहे
बुढ़ाना। आर्य समाज दयानंदनगर के वार्षिकोत्सव के समापन पर वेद की ज्योति जलती रहे, ओम का झंडा ऊंचा रहे का जयघोष किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, न्याय और सदाचरण का अनुगामी बनाती है।
कस्बे के दयानंदनगर स्थित आर्य समाज मंदिर के सभागार में आयोजित वार्षिकोत्सव में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि आत्मा और अंत:करण की पवित्रता तथा सदाचरण से ही मोक्ष की प्राप्ति होगी। अंत:करण सत्य व्यवहार से शुद्ध होता है। द्वेष, छल, कपट , अन्याय, अत्याचार, अंधविश्वास को छोड़कर सद्गुणों को जीवन मे ग्रहण करें, तभी सच्चे सुख की प्राप्ति होगी। छपरौली से आए डॉ भोपाल सिंह आर्य ने कहा कि वेद सत्य सनातन है। वेद ईश्वरीय वाणी है। वैदिक ज्ञान की उपेक्षा से समाज में पाखंड, ढोंग , असत्य को बढ़ावा मिला। शुक्रताल के स्वामी सत्यवेश ने कहा कि संतान को सद् चरित्र बनाने को माता-पिता स्वयं का आचरण श्रेष्ठ बनाए। विद्यार्थी प्रात:काल उठे, योगासन करें और अभिभावक की आज्ञा का पालन करें। भजनोपदेशक विदुषी अंजलि आर्य ने कहा कि वेदों में माता को प्रथम गुरु बताया है, जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति, समृद्धि आती है। अंजलि के प्रेरणाप्रद भजन सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इससे पूर्व, वेद मंत्रों से यज्ञ हुआ, जिसमें यज्ञमान विक्रम सिंह आर्य रहे। ब्रह्मा यज्ञमुनि और पुरोहित राजवीर शास्त्री रहे। प्रधान तेजपाल सिंह आर्य, मंत्री भूपति आर्य, संजीव आर्य आदि ने विचार रखे। यशपाल सिंह, आर्य मित्र, मदनपाल राठी, राम गोपाल आर्य, डॉ. चंद्र पाल आर्य, जय भगवान आर्य, राजेंद्र आर्य, राज सिंह आर्य, ओमपाल सिंह, डॉ. किरण पाल , ब्रजपाल सिंह, कपिल आर्य, शीशपाल आर्य आदि मौजूद रहे।