फायरिंग मामले में दस साल की सजा सुनाई
मुजफ्फरनगर। परासौली गांव में पांच साल पहले पुरानी रंजिश के चलते हत्या की नियत से युवक को गोली मार कर घायल करने के मामले में अदालत ने एक हमलावर को दस वर्ष के सश्रम कारावास और 11 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गांव परासौली निवासी खलील ने 19 जून 2014 को कांधला थाने पर यह मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि आज घटना के दिन सुबह नौ बजे उसका बेटा अमजद खेत में ईंख की खोदाई कर रहा था। गांव के ही इश्तखार पुत्र यूनुस अपने साथियों बूबा, नफीस, फरीद और शाहदीन के साथ आया और पुरानी रंजिश के चलते उसके बेटे अमजद को तमंचे से गोली मार कर गंभीर घायल कर दिया। पुलिस ने जांच के उपरांत इश्तखार, बूबा, नफीस और फरीद के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दी थी। यह मुकदमा एडीजे प्रथम गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में सुनाई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र त्यागी और आशीष त्यागी ने अदालत में सात गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनते हुए बुधवार को अदालत ने इश्तखार को दोषी करार देते हुए धारा 307 में दस वर्ष के कारावास और 11 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। जबकि अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बूबा, नफीस और फरीद को बरी कर दिया।