जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में हंगामा
मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में राज्य वित्त आयोग के तहत 9.50 करोड़ रुपये की योजनाओं के प्रस्ताव पारित हुए। ईंट भट्ठों का लाइसेंस शुल्क चार हजार के बजाय अब सात हजार रुपये कर दिया गया। शाहपुर में जिला पंचायत की जमीन में दुकानें बनाने का भी प्रस्ताव पारित हुआ। सदस्यों ने भी अनेक प्रस्ताव सदन के समक्ष रखे। उधर, नियंत्रण के बावजूद 43 सरकारी विभागों से 23 विभाग के ही अधिकारी बैठक में आए। सभी अधिकारी नहीं आने पर सदस्यों ने सदन में हंगामा किया। अध्यक्ष आंचल तोमर ने बताया कि जिस विभाग के अधिकारी बैठक में नहीं आए, उनकी शासन को रिपोर्ट भेजी है तथा उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
चौधरी चरण सिंह सभागार में सोमवार को जिला पंचायत की बोर्ड बैठक पर्यवेक्षक एडीएम वित्त सियाराम मौर्य की मौजूदगी और अध्यक्ष आंचल तोमर की अध्यक्षता में हुई। एएमए डॉ नूतन शर्मा ने सदन में एजेंडा प्रस्तुत किया। सदस्यों ने बैठक में विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति नहीं होने का मुद्दा उठा कर हंगामा किया। कहा कि बोर्ड बैठक को लेकर विभागों के अधिकारी गंभीर नहीं रहते हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक, सीएमओ, जल निगम के अधिकारी नहीं आए। विद्युत विभाग का भी कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंचा। सदस्यों ने नाराजगी जताते इसे सदन का अपमान बताया। हरेंद्र शर्मा, वंदना वर्मा आदि ने रोष जताते हुए कहा कि जिला पंचायत की बोर्ड मीटिंग में केवल 15 प्रतिशत अधिकारी ही मौजूद रहते हैं। बैठक में कस्बा शाहपुर में स्थित जिला पंचायत की कांजी हाउस भूमि जो टाउन एरिया शाहपुर से वापस प्राप्त कर ली गई, उस पर नियमानुसार दुकानें निर्मित कराने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। बैठक में वीरेंद्र प्रधान, धीरज लाटियान, अनिल सिंह, राकेश वशिष्ठ, संदीप मलिक, नजर सिंह,राजेंद्र ठाकुर, कृष्णा देवी, मोहसीना, दीप्ति पाल, जब्बार, रुबी सिंह आदि मौजूद रहे।