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‘यज्ञ और योग भारतीय संस्कृति के प्राण’

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मुजफ्फरनगर। आर्य समाज बिजोपुरा के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारंभ देवयज्ञ एवं ध्वजारोहण से हुआ। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति के मार्ग पर चलकर ही समाज को पाखंड, अंधविश्वास से मुक्ति मिलेगी। यज्ञ और योग भारतीय संस्कृति के प्राण है।
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सदर ब्लाक के गांव बिजोपुरा में आयोजित आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में वेद प्रचारक पूज्य स्वामी जिलानंद सरस्वती का अंग वस्त्र एवं सम्मान राशि भेंट कर आचार्य गुरुदत्त आर्य ने अभिनंदन किया। वेद मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ में ग्रामीणों ने आहुतियां देकर पाखंड, अंधविश्वास, कुरीतियों को त्यागने का संकल्प लिया। यज्ञमान का दायित्व ग्राम प्रधान गीता रानी और उनके पति दौलत राम ने निभाया। प्रवचन सत्र में आचार्य ने कहा कि मनुष्य की पहचान उसके गुण, कर्म और स्वभाव से करनी चाहिए। ऋषि दयानंद के समाज सुधार आंदोलन को ग्रामीण अंचल तक ले जाने की आवश्यकता है। डॉ धीरज कुमार आर्य ने कहा कि माता-पिता और शिक्षक सदाचारी, संस्कारवान, चरित्रवान होंगे तो बच्चे भी ज्ञानवान और गुणवान बनेंगे। स्वामी सत्यवेश ने कहा कि आर्य समाज प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, न्याय और सदाचरण को प्रेरित करता है। युवा सत्यार्थ प्रकाश पढ़े। अंजलि आर्या ने प्रेरक भजन सुनाए। स्वामी योगानंद, सुरेंद्र शास्त्री, आनंद पाल सिंह आर्य, मंगत सिंह आर्य , डॉ राम कुमार आर्य, नेत्रपाल आर्य, रविन कुमार आर्य, महाश्य बाबू राम आर्य ने विचार रखे। संचालन आरपी शर्मा ने किया।
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