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गैर भाजपाई जाट की हार का मिथक नहीं तोड़ पाए अजित

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गैर भाजपाई जाट की हार का मिथक नहीं तोड़ पाए अजित
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मुजफ्फरनगर। रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह गैर भाजपाई जाट की हार का मिथक नहीं तोड़ पाए। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर हारने वाले बड़े जाट नेताओं की सूची में उनका नाम भी शामिल हो गया है। आज तक के इतिहास में यहां कोई गैर भाजपाई जाट चुनाव नहीं जीत पाया है। हारने वालों में जाट समाज की सभी बड़ी हस्तियां रही हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह, पूर्व मंत्री अनुराधा चौधरी, हरेंद्र मलिक, मेजर जयपाल सिंह, वरुण सिंह शामिल हैं।
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट ने इतिहास दोहरा दिया है। यह लोकसभा सीट गैर भाजपाई जाट के लिए अब तक फायदे का सौदा साबित नहीं हुई है। यहां से जो भी बड़ा जाट नेता चुनाव लड़ा उसे हार का मुंह देखना पड़ा। रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह भी हारने वाले बड़े राजनेताओं की सूची में शामिल हो गए हैं। इस लोकसभा सीट पर 1971 में उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह उस समय चुनाव हार गए थे, जब जिले की सभी आठ विधानसभा सीटों पर उनकी पार्टी बीकेडी के विधायक थे, उन्हें सीपीआई और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी ठाकुर विजयपाल सिंह ने हराया था। 1962 में सीपीआई के मेजर जयपाल सिंह कांग्रेस के सुमत प्रसाद जैन के खिलाफ चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में वह हार गए। इसके बाद 1971 में चौधरी चरण सिंह, 1977 में वरुण सिंह कांग्रेेस के टिकट पर लड़े। इस चुनाव में में वह लोकदल के सईद मुर्तजा से चुनाव हार गए। 1998 में जिले के बड़े जाट नेता हरेंद्र मलिक ने सपा से चुनाव लड़ा और वह भाजपा के सोहनवीर सिंह से चुनाव हार गए। 2009 के लोकसभा चुनाव में उस समय जिले की राजनीति में वर्चस्व स्थापित करने वाली अनुराधा चौधरी रालोद से चुनाव लड़ी, उन्हें बसपा के कादिर राना से हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 में इस बार रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह की मैदान में उतरे और हार का इतिहास दोहरा दिया।
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भाजपा का जाट प्रत्याशी पांचवीं बार जीता
मुजफ्फरनगर। लोकसभा की राजनीति में जाट का पहली बार 1991 में खाता खुला। भाजपा के नरेश बालियान जनता दल के मुफ्ती मौहम्मद सईद को चुनाव हराकर विजयी हुए। 1996 में भाजपा के ही सोहनवीर सिंह ने सपा के संजय सिंह को पराजित किया। 1998 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सोहनवीर सिंह सपा के हरेंद्र मलिक को पराजित कर विजयी हुए। 2014 में भाजपा के डॉ संजीव बालियान ने फतह हासिल की। 2019 में एक बार फिर संजीव बालियान ने जीत हासिल की। खास बात यह है कि जाट की जीत केवल भाजपा से ही हुई है।
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कुंभ राशि के प्रत्याशी से ही हारे अजित
मुजफ्फरनगर। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि चौधरी अजित सिंह जो भी चुनाव हारे वह कुंभ राशि के नेता से ही हारे। बागपत में वह पहली बार सोमपाल शास्त्री से हारे। दूसरी बार 2014 में उनकी हार सतपाल सिंह के सामने हुई। इस बार भी वह कुंभ राशि के संजीव बालियान से ही हारे।
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