फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदलते गए निजाम, 23 साल में भी नहीं मिला इंसाफ

विज्ञापन
विज्ञापन
बदलते गए निजाम, 23 साल में भी नहीं मिला इंसाफ
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। सूबे में निजाम बदस्तूर बदलता गया, मगर बीते 23 साल से कचहरी में धरने पर बैठे विजय सिंह को इंसाफ नहीं मिला। शामली जिले के गांव चौसाना की चार हजार बीघा सार्वजनिक भूमि और अन्य सरकारी संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने को उन्होंने यह सत्याग्रह 26 फरवरी 1996 को प्रारंभ किया था। दो दशक से ज्यादा संघर्ष की यात्रा में जीवट का यह पथिक अभी भी उसी जोश और जज्बे के साथ सत्य और न्याय पाने की जद्दोजहद में डटा है।
मुजफ्फरनगर की कचहरी का बरामदा आंदोलनकारी विजय सिंह का ठिकाना है। उनका धरना आज 24 वें साल में दाखिल हो जाएगा। वर्ष 1982 में अध्यापन कार्य से जिंदगी के सपने बुने, मगर एक घटनाक्रम ने उनकी राह बदल दी। गांव के गरीबों की जमीनों पर दबंगों का कब्जा था। उनके हक की आवाज बनने को उन्होंने स्कूल से इस्तीफा दे दिया। तहसील से खोजबीन की तो पता चला कि उनके गांव चौसाना में 4575 बीघा जमीन सार्वजनिक है, जिसमें चार हजार पर अवैध कब्जा है। उनके अंतर्मन में ऐसा संकल्प बना कि उन्होंने भू-माफिया से गरीबों की जमीन मुक्त कराने के लिए घर बार छोड़ दिया। 26 फरवरी 1996 को वह डीएम को कचहरी में इसी मामले की जांच को अर्जी देने आए थे। अधिकारियों ने कोई गौर नहीं किया। वो दिन और आज विजय सिंह डीएम ऑफिस के सामने टाट-पल्ली का घरौंदा बना कर कचहरी में अडिग धरने पर बैठे है। सूबे में सरकार आती रही, मगर सरकारी सिस्टम के आगे जूझते विजय सिंह को 23 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार है।
विज्ञापन


जांच कमेटी भी नहीं दे पाई न्याय
मुजफ्फरनगर। विजय सिंह ने 30 मार्च 2012 को सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए कचहरी से लखनऊ तक पदयात्रा की। 19 दिन में करीब 600 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर उनकी तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से भेंट हुई। सीएम के निर्देश पर प्रमुख सचिव राजस्व की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने उनके बयान और पत्रावालियां ली, लेकिन सात वर्ष से वह जांच फाइलों में दबी पड़ी है।
विज्ञापन


सबसे लंबे धरने का बनाया रिकार्ड
मुजफ्फरनगर। महात्मा गांधी और विनोवा भावे से प्रेरित विजय सिंह का धरना देश और दुनिया का सबसे लंबा धरना घोषित हो चुका है। लिम्का बुक्स ऑफ रिकार्ड, एशिया बुक, यूनिक वर्ल्ड रिकार्ड ने उन्हें सबसे लंबे सत्याग्रह का प्रशस्ति पत्र दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें