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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने डाला डेरा

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सिखेड़ा। जल प्रदूषण के कारण गंभीर बीमारियों से घिरे ग्रामीणों की जांच के लिए मेरठ और जनपद के चिकित्सकों ने कैंप लगाया। कैंप में रोगियों के लिए खाज-खुजली तक की दवाइयां नहीं मिल सकी। चिकित्सकों द्वारा जांच के नाम पर खानापूर्ति करने का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने हंगामा किया।
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निराना गांव में आसपास की फैक्ट्रियों के दूषित जल से गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। आधा गांव खाज-खुजली, त्वचा रोग से पीड़ित है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग कैंसर से ग्रस्त हैं। इससे गांव में भय का माहौल है। फैक्ट्रियों का दूषित जल नाले में बहाया जा रहा है, जो भू-जल में बैठ रहा है। उसके बाद लोगों के हैंडपंपों से विषैला पानी निकल रहा है। इसके इस्तेमाल से ग्रामीण परेशान है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसकी जांच की थी तो अलग-अलग कारणों से कैंसर पाया गया था। जबकि 50 से अधिक लोगों का बीमार होना सामने आया था। राख से लोगों की आंख में जख्म बनने से खराब हो गई है। इसको लेकर शुक्रवार को मेरठ मेडिकल कालेज से छाया मित्तल के निर्देशन में छह सदस्य चिकित्सकों का दल पहुंचा। टीम में डॉ देवेंद्र बोहरा, डॉ प्रशांत भटनागर, डॉ लुबना जरीन, डॉ संतोष यादव, डॉ अनिवाश शर्मा पहुंचे।
जबकि जनपद के स्वास्थ्य विभाग से मखियाली और बहादरपुर से दवाइयां लेकर फार्मेसिस्ट आए थे। कैंप में मरीजों की जांच की गई तो लंबी कतार लग गई। चंद घंटे बाद ही स्वास्थ्य विभाग की दवाइयां खत्म हो गई। जांच के बाद खाज-खुजली आदि की दवाइयां तक भी नहीं मिल सकी। इसको लेकर ग्रामीणों ने हंगामा खड़ा कर दिया। चिकित्सकों पर जांच के नाम पर खानापूर्ति करने के आरोप लगाया। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण संघर्ष समिति के महासचिव प्रवेश पाल, अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर, डॉ इकराम, इफ्तिखार, आशू खान, मरगूब राजा, विजय पाल आदि लोगों ने फैक्ट्रियों पर कार्रवाई किए जाने और लगातार गांव में चिकित्सकीय कैंप लगाए जाने की मांग की है।
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