डीआईओएस पर शासन की नजरें इनायत
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड परीक्षा में सामूहिक नकल के खुलासे और सीडीओ की जांच में दोषी पाए गए डीआईओएस प्रवीण मिश्रा पर शासन की नजरें इनायत हैं। डीएम अजय शंकर पांडेय की रिपोर्ट के बाद मिश्रा का प्रयागराज के लिए स्थानांतरण कर दिया गया। दो माह बाद भी उन्हीं के पास डीआईओएस का चार्ज है।
गैर राज्य और गैर बोर्ड के परीक्षार्थियों का पंजीकरण केंद्र जिला मुख्यालय के जीआईसी को बनाए जाने का शासनादेश है। नकल माफिया का डीआईओएस दफ्तर पर ऐसा शिकंजा है कि उन्होंने राजकीय हाईस्कूल रोनी हरजीपुर और जीआईसी मुथरा से इंटरमीडिएट के 623 अभ्यर्थियों के फार्म भराए थे। इन्हीं परीक्षार्थियों का सेंटर चरथावल ब्लाक के जनता इंटर कॉलेज बाढ़ को बनाया गया। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के निर्देश पर एसटीएफ ने 22 फरवरी को फिजिक्स के पेपर में छापा मारकर सामूहिक नकल तथा फर्जी कक्ष निरीक्षक और नकल माफिया को पकड़ा था। मामले में डीएम ने डीआईओएस की संलिप्तता की जांच के लिए सीडीओ अर्चना वर्मा को जिम्मा सौंपा। सीडीओ की रिपोर्ट में दोषी पाए गए डीआईओएस प्रवीण मिश्रा का तबादला प्रयागराज स्थित माध्यमिक शिक्षा परिषद में सहायक निदेशक के पद पर कर दिया गया। गाजियाबाद की डायट की प्राचार्या निशा अस्थाना को जिले में नया डीआईओएस बनाया गया। चौंकाने की बात यह है कि नई डीआईओएस दो माह बाद भी चार्ज नहीं ले पाई। जिन्हें बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था में दोषी ठहराया गया, वही डीआईओएस अभी भी जिले में जमे हुए हैं। बताते चलें कि एसटीएफ की कार्रवाई के बाद चरथावल थाने में केंद्र व्यवस्थापक योगेंद्र पाल सिंह, डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रबंधक कमर इंतखाब सहित 17 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के वादी डीआईओएस ही हैं।
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