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आठ शुगर मिलों समेत 123 उद्योगों को राहत

Wed, 15 Nov 2017 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
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suger mill - फोटो : amar ujala
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मुजफ्फरनगर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदूषण वाद पर सुनवाई के बाद निर्णय दिया है। निर्णय में जिले की सभी आठ शुगर मिलों समेत 123    कारखानों को राहत दी गई है।
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शनिवार से बंद शुगर मिल और औद्योगिक इकाईयां बुधवार से मशीनरी का संचालन कर सकेंगी। हालांकि वायु प्रदूषण को कम करने के औद्योगिक इकाईयों को उपाय दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। संचालन पर लगी रोक हटने से औद्योगिक घरानों और शुगर मिल प्रशासनों ने राहत की सांस ली है। 

दिल्ली और एनसीआर में बढ़े प्रदूषण के कारण सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। स्मॉग और कोहरा छाने से स्थिति अधिक बदतर हो गई। दिन में शाम जैसा मौसम हो रहा है।
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धुंध में प्रदूषण के बारीक पार्टिकुलेट मैटर घूमने से सांस रोगियों के साथ आम लोगों को भी परेशानियां भी हुई। बढ़ती परेशानी को दूर करने के लिए एनजीटी ने एनसीआर क्षेत्र में पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों के संचालन पर रोक लगाने के साथ औद्योगिक इकाईयों और निर्माणदायी संस्थाओं पर 14 नवंबर तक पाबंदी लगा दी थी।

इसको लेकर जिले में भी मोरना, तितावी, बुढ़ाना, खतौली, मंसूरपुर, पुरकाजी की खाईखेड़ी, रामराज की टिकौला, रोहाना चीनी मिल के साथ लोहा, प्लाइवुड, स्टील, इस्पात की 123 इंडस्ट्रियों को बंद करके के नोटिस जारी किए थे। 

इन सभी मिलों और औद्योगिक इकाईयों में 14 नवंबर तक उत्पादन कार्य के साथ उत्सर्जन प्रक्रिया को बंद कर दिया गया। मौजूदा समय में चालू पेराई सत्र में अचानक मिलों के बंद होने के आदेश से किसानों, शुगर मिलों में आक्रोश फैल गया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय ने एनजीटी के आदेश का हवाला देकर कार्रवाई की थी।

मंगलवार (14 नवंबर) को एनजीटी की पीठ ने इस प्रकरण को लेकर सुनवाई की। एनजीटी ने बंद हुई शुगर मिलों समेत 123 इंडस्ट्रियों को संचालन के लिए हरी झंडी दे दी है। बुधवार से यह सभी अपना उत्पादन कार्य प्रारंभ कर सकेंगी। हालांकि पहले वायु प्रदूषण की रोकथाम आदि के उपायों को दुरुस्त रखना होगा। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अवर अभियंता विपुल कुमार ने बताया कि जिले की सभी इंडस्ट्रियों को एनजीटी ने राहत दे दी है।

बुधवार से सभी इंडस्ट्रियां उत्पादन कार्य शुरू कर सकती है। हालांकि एनजीटी से अभी लिखित में कोई निर्णय नहीं पहुुंचा है, केवल केस की सुनवाई के दौरान यह निर्णय होना बताया गया है। उसके           आधार पर ही बंद हुआ संचालन खोला गया है। 

पेटकोक जलने से हवा में फैल रहा जहर
मुजफ्फरनगर। एनसीआर में बढ़े प्रदूषण को लेकर एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गए हैं। सख्ती के बाद भी जिले की इंडस्ट्रियां सुधरने का नाम नहीं ले रही है।

जनपद की 14 इंडस्ट्री ऐसी पाई गई हैं, जो खतरनाक पेटकोक को ईधन के रूप में इस्तेमाल कर रही है। यह अन्य ईंधन के मुकाबले कई गुणा आबोहवा में जहर फैलाता है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंडस्ट्रियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। उधर, कोल्हूओं के लिए भी बोर्ड ने मानक तय करने प्रारंभ कर दिए हैं। 

दिल्ली, एनसीआर और गाजियाबाद क्षेत्र में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से बुरा हाल है। औद्योगिक इकाईयों के उत्सर्जन से स्थिति अधिक खराब हो गई। बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए एनसीआर में निर्माण इकाईयां बंद कर दी गई। मौसम में तब्दीली और स्मॉग का असर जिले में भी है। 

यहां भी सुबह और शाम हालात बेकाबू हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जिले की इंडस्ट्रियों पर स्टडी की है, जिसमें सामने आया है कि यहां भी 14 औद्योगिक इकाईयों में खतरनाक पेटकोक को ईंधन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। यह पेेटकोक पेट्रोलियम पदार्थ है, जो कि ऑयल रिफाइनरी के कचरे से निकलता है। 

इन इंडस्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सहायक इंजीनियर डॉ डीसी पांडे ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण को लेकर इंडस्ट्रियों को धुआं उत्सर्जन कम करने के लिए कहा गया है। हालांकि 14 इंडस्ट्रियां ऐसी मिली है, जो खतरनाक पेटकोक जलाकर उत्पादन कर रही है। इससे प्रदूषण का अधिक खतरा है। इन्हें नोटिस दिया गया है। 
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