गीतकार नीरज के निधन से छाई उदासी
मुजफ्फरनगर। दिल की कलम से काव्य और गीतों में समृद्धि के रंग भर गए महाकवि गोपालदास नीरज के देहावसान से श्रोताओं में उदासी छा गई है। नीरज के चाहने वालों की जिले में भी लंबी फेहरिस्त है। चाहे कवियों का मंच हो या फिर बॉलीवुड का पर्दा, जिसने भी उन्हें सुना वो उनके गीतों का दीवाना हो गया। पांच वर्ष पहले टाउन हाल मैदान में हुए कवि सम्मेलन में उन्होंने अंतिम बार यहां काव्य पाठ किया था।
मशहूर गीतकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज के निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर है। ‘आंसु जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा/ जहां प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा’-नीरज जी की ये पंक्तियां गीतों के कद्रदानों को कभी नहीं भूलेगी। वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व बीएसए हरपाल सिंह अरुष ने कहा कि वर्ष 1966 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में नीरज से पहले मुलाकात हुई थी। उनका निधन एक युग की समाप्ति है। साहित्यकार राधा मोहन तिवारी कहते है कि नीरज दर्द या प्रेम के ही गीतकार नहीं थे, बल्कि गीतों में गहन दार्शनिकता का समावेश करने वाले रचनाकार थे। खतौली निवासी प्रसिद्ध शायर रियाज सागर का कहना है कि कवि नीरज हिंदी और उर्दू के मध्य एक सेतु का कार्य करते थे।
एडीएम प्रशासन एवं साहित्यकार हरीशचंद्र बताते हैं कि प्रशासनिक सेवा में अलीगढ़ में कई मर्तबा नीरज जी को सुनने का मौका मिला। उनकी विनम्रता ऊर्जा देती थी। डॉ प्रदीप जैन ने कहा कि अनेक बार शहर में हुए कवि सम्मेलनों में पधारे नीरज जी को सुनने के लिए श्रोता रात भर पंडालों में जमे रहते थे। कवि नेमपाल प्रजापित कहते हैं कि महाकवि नीरज जन्मजात कवि और गीतकार थे। अपने काव्य और दर्शन की ज्ञान ज्योति से उन्होंने हिंदी साहित्य को विशिष्टता दी। काल का पहिया घूमे रे भैय्या, बस ये ही अपराध में हर बार करता हूं, ऐ भाई जरा देख के चलो, जैसे अमर गीत हमेशा जिंदा रहेंगे।