हमारी संस्कृति में पंच महायज्ञ का विधान
मोरना (मुजफ्फरनगर)। नवग्रह शनिधाम में चल रहे विष्णु भगवान महायज्ञ के आयोजन मौके पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि शुकदेव पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि हवन में जो आहुति डाली जाती है, वह मानव के शरीर में सूक्ष्म रूप में बैठ जाती है। इससे पूर्व, शनिधाम में मुख्य अतिथि का माला पहनाकर स्वागत भी किया गया।
शुक्रताल स्थित शनिधाम में सवा करोड़ मंत्रों के जाप से विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि पाप, कर्म, मुक्ति के लिए हमारी संस्कृति में पंच महायज्ञ का विधान बताया गया है, जिन्हें नित्य प्रति करना चाहिए। यज्ञ स्वरूप कर्म में रहकर परमात्मा साक्षी रहकर स्वयं फल का विधान करता है। यज्ञ की अग्नि को देवताओं का मुख कहा गया है। उसमें वेद मंत्रोच्चारण से देवताओं को आह्वान कर डाली गई आहुति के द्वारा सूक्ष्म होकर उस देवता के पास पहुंच जाती है, जिसका अंश होती है। इस मौके पर पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महंत स्वामी गंगा पुरी महाराज तथा अखिल भारतीय साधु संत समाज हरियाणा के महंत बंशी पुरी महाराज, आश्रम प्रबंधक स्वामी उत्तम गिरि महाराज, स्वामी पुरुषोत्तम गिरि महाराज आदि ने स्वामी ओमानंद को शॉल ओढ़ा कर व पुष्प भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, स्वामी जी ने भी स्वामी गंगा पुरी महाराज को पटका पहनाते हुए ग्रंथ भेंट किया। इस मौके पर उत्प्रेती आचार्य, अचल शास्त्री, राजू आदि उपस्थित रहे।