दिव्यांगों को दया नहीं प्यार की जरूरत : कृष्णपाल गुर्जर
मुजफ्फरनगर। केंद्रीय सामाजिक और अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि देश का कोई भी बच्चा अब मूक-बधिर नहीं रहेगा। पांच साल से कम के सभी बच्चों के ऑपरेशन सरकार कराएगी। व्योश्री योजना में 60 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों को कानों की मशीन, चश्मा, मुंह के जबड़े को आवश्यकता पड़ने पर सरकार देगी। मोटराइज्ड ट्राई साइकिल देकर दिव्यागों को शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है। उन्होंने यहां 1261 दिव्यांगों को 2458 उपकरण और कृत्रिम अंग वितरित किए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को दया नहीं प्यार की जरूरत है।
बृहस्पतिवार को राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित सामाजिक अधिकारिता शिविर एवं नि:शुल्क सहायक उपकरण वितरण समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि केंद्र सरकार 60 साल से ऊपर के बीपीएल धारकों के लिए व्योश्री योजना प्रारंभ करने जा रही है। साठ साल के बाद जिन लोगों को कम सुनाई पड़ता है, उन्हें सुनने की मशीन, कम दिखने पंर चश्मा और जबड़ा दिया जाएगा। जब किसी का बच्चा बोल और सुन नहीं पाता तो वह बहुत दुखी होता है। पैसे वाला तो इलाज करा लेता है, गरीब के बच्चे ठीक नहीं हो पाते थे। केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है कि देश के पांच साल से कम के समस्त मूक-बधिर बच्चों का उपचार कराया जाएगा। प्रत्येक बच्चे पर सरकार छह लाख रुपये खर्च करेगी, अब तक 1500 बच्चों का उपचार कराया जा चुका है। सभी बच्चे बोल और सुन रहे हैं। अब बच्चा पापा और मम्मी बोलता है तो मॉ-बाप की खुशी अलग ही झलकती है। यदि ऐसा कोई भी बच्चा हो डीएम उसका नाम मंत्रालय को भेजें। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को दया नहीं प्यार की जरूरत है। खेलों, शिक्षा और प्रशासन में दिव्यांगों ने मान बढाया है। यूपी एससी की परीक्षा में बीते वर्ष दिव्यांग बेटी टॉपर रही। ओलंपिक में हम दो मेडल जीते और पैरा ओलंपिक में हमें चार मेडल मिले। मोदी सराकर में देश में अब तक 400 लोकसभा क्षेत्रों में कैंप लग चुके हैं। दस लाख लोगों को उपकरण और कृत्रिम अंग दिए गए। मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र ऐसा है, जहां दोबारा कैंप लगा है। जर्मनी और इंग्लैंड की कंपनियों से टाईअप करके कानपुर में आधुनिक उपकरण बनाकर दिव्यांगों को दिए जा रहे हैं। सुगम्य भारत योजना में देश के पचास शहरों में दिव्यांगों की यात्रा को आसान बनाया जा रहा है। पहले सात तरह के दिव्यांगों को लाभ मिलता था। अब 21 तरह के दिव्यांगों को इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने 1261 दिव्यांगों को 2458 उपकरण और यंत्र वितरित किए। इनमें 135 मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल, 119 ट्राई साइकिल, 114 फोल्डिंग व्हील चेयर, 134 कृत्रिम अंग, 960 कैलिपर्स वितरित किए गए।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान ने कहा कि वह चाहते हैं कि 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग को मोटराइज्य ट्राईसाईकिल मिले। वे अपनी सांसद निधि से सहायता करेंगे। जिले में जो भी दिव्यांग कैंप से वंचित रह गया हो, उसे भी सुविधा दिलाई जाएगी। सरधना विधायक संगीत सोम, शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल, बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक ने भी विचार रखे। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन सतपाल पाल, अल्पसंख्यक आयोग सदस्य सुखदर्शन बेदी, राजीव गर्ग, हरीश अहलावत, चेयरमैन परमेश सैनी, शरद शर्मा, देशबंधु तोमर, हरेंद्र पाल आदि मौजूद रहे।
दिव्यांगों का बैकलॉग भरा
मुजफ्फरनगर। देश में दिव्यांगों के बैकलॉग के 15 हजार पद खाली थे। इसमें 14500 पर भर्ती हो चुकी है। 500 की प्रक्रिया दो माह में पूरी हो जाएगी। सरकारी नौकरी में चार प्रतिशत और हायर एजूकेशन में पांच प्रतिशत आरक्षण कर दिया गया है।
पूरे देश में एक जैसा आईकार्ड होगा
मुजफ्फरनगर। दिव्यांगों को दूसरे प्रदेश में जाने के बाद समस्याओं का सामना करना पड़ता था। मंत्रालय ने निर्णय लिया कि अब पूरे देश में एक यूनिवर्सल आईकार्ड होगा। यह कार्ड सभी राज्यों में चलेगा। दिव्यांगों को प्रदेश हीं नहीं देश भर में लाभ मिलेगा।
ट्राई साइकिल पा गदगद हुए दिव्यांग
मुजफ्फरनगर। दिव्यांगता के कारण घर से बाहर नहीं निकल पा सकने वाले मोटराइज्ड ट्राइ साईकिल पा झूम उठे। एक बार चार्ज करने पर उनकी बैट्री 45 किमी चल पाएगी। इससे पढ़ने वाले स्कूल जा सकते हैं और बेरोजगार रोजगार भी कर सकते हैं। ट्राईसाइकिल में पीछे सामान रखने की जगह भी दी गई है।
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